ग्वालियर भाजपा अध्यक्ष पर नहीं बन पा रही सहमति, गुटबाजी हावी


भाजपा जिला अध्यक्षों की घोषणा अब वीरबल की खिचड़ी बनकर रह गई है। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और गुटबाजी ने जिलाध्यक्ष के पद की लड़ाई सार्वजनिक कर डाली है। ग्वालियर की बात करें तो यहां दो गुटों में जिलाध्यक्ष को लेकर जबरदस्त द्वंद चल रहा है। वहीं वर्तमान जिलाध्यक्ष की भी ताकत उभरकर सामने आ गई है। ग्वालियर में तोमर और सिंधिया गुट ने अपने अपने नाम आगे बढ़ाकर हाईकमान के पास भेज दिये है। जबकि जो रायशुमारी की गई थी तो वह फिर बेकार की कवायद ही साबित हुई है। मतलब पार्टी इन डिफरेंस में कार्यकर्ताओं की राय की कोई बख्त ही नहीं है। रायशुमारी में कार्यकर्ताओं की जिलाध्यक्ष के लिये पसंद पूछी गई थी। लेकिन बाद में नेताओं की पसंद लिफाफों में भेज दी गई। फिर कार्यकर्ताओं की पसंद का महत्व ही कहा रहा। यहां तो नेता अपने हिसाब से गोटी फिट करने में लगे है। जिससे उनके हिसाब से भाजपा चल सकें। लेकिन कुछ भी हो हाईकमान पर गुटीय नेताओं का इतना दबाब है कि वह जिलाध्यक्ष ही तय नहीं कर पा रहे है। जिससे अब तक नाम पर सहमति ही नहीं बन सकी है। बस कयासों का बाजार चल रहा है।