जहरीले कफ सिरप से 24 बच्चों की मौत का मामला, विसरा रिपोर्ट में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की पुष्टि

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वर्ष 2025 में सामने आए चर्चित कफ सिरप कांड में बड़ा खुलासा हुआ है। बच्चों की मौत के मामले में आई विसरा रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मौतें जहरीले रसायन डाई-एथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) के कारण हुईं। यह रसायन कोल्ड्रिफ कफ सिरप में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में पाया गया।

जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों के बच्चों को सर्दी, खांसी और बुखार जैसी सामान्य शिकायतें थीं। परिजन उन्हें परासिया स्थित एक सरकारी चिकित्सक के निजी क्लीनिक पर ले गए थे। चिकित्सक द्वारा कोल्ड्रिफ कफ सिरप लिखे जाने के बाद बच्चों को दवा दी गई। कुछ ही दिनों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उल्टी, पेशाब कम होना और शरीर में सूजन जैसे लक्षण बताए। हालत गंभीर होने पर कई बच्चों की किडनी फेल हो गई और एक-एक कर 24 बच्चों की मौत हो गई।

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विसरा जांच में पुष्टि
परासिया के एसडीओपी एवं एसआईटी प्रभारी जितेंद्र सिंह जाट ने बताया कि मृत बच्चों के आंतरिक अंगों की जांच में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की मौजूदगी पाई गई है। यह रसायन किडनी पर गंभीर प्रभाव डालता है और अंगों को निष्क्रिय कर देता है। उन्होंने बताया कि कफ सिरप के नमूनों में भी यही केमिकल अत्यधिक मात्रा में मिला है। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो गया है कि मौतें जहरीली दवा के सेवन से हुईं।

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सप्लीमेंट्री चार्जशीट होगी दाखिल
एसआईटी के अनुसार, विसरा रिपोर्ट के आधार पर अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी। इसमें वैज्ञानिक साक्ष्यों को शामिल कर आरोपियों के खिलाफ मजबूत कार्रवाई की जाएगी।

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11 आरोपी गिरफ्तार
मामले में कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक रंगनाथन, दवा लिखने वाले डॉक्टर प्रवीण सोनी, स्टॉकिस्ट और केमिकल विश्लेषक सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

सितंबर 2025 में बच्चों की लगातार मौतों से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया था। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। अब विसरा रिपोर्ट आने के बाद मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। मामले की अगली सुनवाई में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश किए जाने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।