
ग्वालियर । किसी भी शहर की सूरत तब बेहतर बनती और दिखती है जब वहां की ट्रैफिक सुविधाएं बेहतर होती हैं लेकिन शहर में हालात उलटे हैं। यहां शहर को स्मार्ट बनाने में करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी स्थिति यह है कि हर रोज ट्रैफिक रेंग कर ही चल रहा है। प्रशासन से लेकर पुलिस ने जो प्रयोग किए, वह सफल नही हो सके है। यही कारण है कि ग्वालियर को स्मार्ट शहर तो कहा जाने लगा है, लेकिन यहां का ट्रैफिक किस तरह से चलता है यह किसी से छिपा नहीं है।
शहर की आबादी बढ़ने के साथ ही सीमा का विस्तार भी हुआ है, लेकिन ट्रैफिक के हालात जिस तरह से बिगड़े हुए हैं, उसमें लोग हर रोज सर्दी के मौसम में भी सड़कों से निकलने के लिए पसीना बहाने को मजबूर होते हैं। ऐसा नहीं है कि सड़कों का चैड़ीकरण न हुआ हो, लेकिन वाहन भी उसी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हालात यह हैं वाहनों की रेलमपेल से हर जगह जाम लगा रहता है। कहने को स्मार्ट शहर बनाने के लिए करोड़ों की राशि खर्च की जा चुकी है पर उसके बाद भी शहर की सूरत बिगड़ी हुई नजर आ रही है, तो जिम्मेदारों पर सवाल उठना लाजिमी है। शहर का लगातार विस्तार होता जा रहा है। शहर को स्मार्ट बनाने केलिए करोड़ों की राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन यह राशि किस तरह से खर्च की जा रही है, वह किसी से छिपा नहीं है, पर उसको लेकर किसी भी जनप्रतिनिधि ने सवाल उठाने की हिमाकत नहीं की है। अब इसके पीछे क्या कारण है यह जनप्रतिनिधि ही बता सकते हैं। स्मार्ट सिटी के तहत शहर के कुछ हिस्सों में ही सड़कों को ठीक किया गया है? सड़कें खुदी पड़ी हैं, जिसके कारण भी ट्रैफिक बदहाल हो रहा है, क्योंकि जो सड़के खुदी हैं और जहां पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है, उसके कारण ट्रैफिक एक ही सड़क पर आ गया है।
शहर की आबादी इस समय करीब 15 से 16 लाख के बीच है और यहां वाहनों की संख्या 7 लाख से ऊपर हो चुकी है। इसमें लोकल परिवहन के वाहन अलग से हैं, जो शहर की सड़कों पर ट्रैफिक की चाल बिगाड़ने में सहायक बने हुए हैं। नए साल का आगाज भी सड़कों पर वाहनों के रेंगकर चलने के साथ हुआ और हालत इस कदर बिगड़ी थी कि एक रास्ते से निकलने में ही लोगों को घंटों का इंतजार करना पड़ा। पुलिस किसी भी चैराहे पर दिखाई तक नहीं दी थी।
यह कैसा स्मार्ट शहर, जहां रेंग कर चलता है ट्रैफिक

