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ग्वालियर| भीतरवार इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं का एक शर्मनाक चेहरा सामने आया. गांव में दर्द से कराहती प्रसूता क़ो अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों क़ो एम्बुलेंस नहीं मिली. इसके बाद वे ई रिक्शा से शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें अस्पताल कर्मचारियों की बदतमीजी का आमना करना पड़ा, जिससे महिला का प्रसव ई रिक्शे में ही हो गया.
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जानकारी के अनुसार, भीतरवार इलाके में रहने वाली प्रसूता दीपा प्रजापति क़ो अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजनों ने जननी एम्बुलेंस के लिए कॉल लगाया, लेकिन चालक ने नेटवर्क प्रॉब्लम बताकर काट दिया. इस बीच प्रसूता का दर्द लगातार बढ़ता जा रहा था. परेशान परिजनों ने एम्बुलेंस का इंतजार करने की जगह उसे ई रिक्शा से ही अस्पताल ले जाने का फैसला किया और फिर शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे. लेकिन, वहां भी उनकी मुसीबतें कम नहीं हुई. अस्पताल में न डॉक्टर थे और न कोई अन्य स्टाफ. जो स्टाफ था भी वह भी अभद्र व्यवहार करने लगा. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अटेंडर से कहा गया कि चुप हो जा, क्यों बक-बक कर रही है. इस सब के बीच प्रसूता दीपा प्रजापति की डिलीवरी अस्पताल परिसर में खड़ी ई रिक्शा में ही करानी पड़ी.
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परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि डिलीवरी के समय अस्पताल में न कोई महिला चिकित्सक, न ड्यूटी डॉक्टर और न ही पर्याप्त स्टाफ था. केवल एक सिस्टर ड्यूटी पर थी जो 10 मिनट बाद ई रिक्शा वाहन तक पहुंची. लेकिन, तब तक प्रसूता की हालत गंभीर हो चुकी थी. बच्चा उल्टी स्थिति में फंसा था, मजबूरन महिलाओं को ई रिक्शा में ही डिलीवरी करानी पड़ी, गनीमत है कि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. प्रसूता के पति ने बताया कि उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया था,लेकिन संपर्क नहीं हो सका. जिस ड्राइवर से बात हुई वह स्थानीय जननी वाहन चालक नहीं था.
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