दलालों ने गिराया मेले का स्वरूप…

(धीरज बंसल)

भास्करप्लस.काम
ग्वालियर व्यापार मेले में भव्यता और विस्तार की बात अब बेगानी बनकर रह गई है। मेला अब अपनी विरासत तक नहीं बचा पा रहा है। मेला में जब से दलाल सक्रिय हो गये है तब से लगातार मेला का स्वरूप गिरता जा रहा है। दुकान माफिया और प्राधिकरण के कर्मचारियों की मिलीभगत का आलम यह है कि कारोबार बंद कर चुके कारोबारियों की दुकानें लिखित पत्र देने के बाद भी कागजों में सरेंडर नहीं की जा रही हैं, इन्हीं दुकानों को दूसरों को आवंटित कर दुकान प्राधिकरण के कर्मचारी लाखों रुपए वसूल रहे हैं। भास्करप्लस.काम
जहां तक मेला में नई गतिविधि और सांस्कृतिक कैलेण्डर की बात करें तो सबकुछ धुंधला ही है। ना तो अब तक सांस्कृतिक कैलेण्डर बन सका है और ना ही कोई नई गतिविधि दिखाई दे रही है। हर वर्ष मेला का स्वरूप सिकुडता जा रहा है। मेला बोर्ड में राजनीतिक नियुक्ति भी नहीं होना बड़ी वजह है। सबकुछ अधिकारियों के हाथ में होकर रह गया है। अधिकारी समय मेला को देते ही नहीं इससे मेला की भव्यता जो होना चाहिये है वह तार-तार होती जा रही है। वहीं शहर के व्यापारियों को दुकानें नहीं मिल पा रही हैं। दुकान माफिया और प्राधिकरण के कर्मचारियों के गठजोड़ का परिणाम यह है कि मेले में बाहर से आने वाले बड़े व्यापारी और स्थानीय बड़े शोरूमों की संख्या कम होती जा रही है। पिछले एक दशक में लगातार गिरते मेले के स्तर को देखते हुए सैलानियों की संख्या में भी कमी आई है। व्यापार मेले की शुरुआत 25 दिसंबर से हो चुकी है। लेकिन अभी तक प्राधिकरण औपचारिक शुभारंभ नहीं कर पाया है और ना ही अब कोई तिथि व अतिथि को लेकर कोई जानकारी समाने आई है। लेकिन दुकानों की कालाबाजारी के कारण अभी तक मेले की काफी दुकानें पूरी तरह से खाली पड़ी हैं। ये दुकानें भी माफिया के कब्जे में हैं, जो अभी महंगा किराया वसूलने की जुगाड़ में ऐसे कारोबारियों का इंतजार कर रहा है। भास्करप्लस.काम
हालांकि मेला प्राधिकरण के पदाधिकारियों का दावा है कि सभी दुकानों का शत-प्रतिशत आवंटन कर दिया गया है। यही कारण है कि अभी तक 40 प्रतिशत भी मेला तैयार नहीं हो सका है। एक भी सेक्टर में दुकानें पूरी तरह से नहीं बन सकी हैं। कश्मीरी बाजार, मीना बाजार समेत अन्य सेक्टरों में दुकानों का बनना भी शुरू नहीं हुआ है। केवल झूला सेक्टर 80 प्रतिशत तैयार हुआ है। पिछले एक दशक से लगातार गिर रही मेले की साख ने सैलानियों की संख्या भी कम कर दी है। मेले में दुकानों के ब्लैक होने के कारण बाहर के व्यापारियों को दुकानें नहीं मिल पाती। इसी के कारण धीरे-धीरे अन्य राज्यों के व्यापारियों ने मेले में आना बंद कर दिया है।

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