
– फ्री फार आल के बाबजूद प्रवेश नहीं देना निंदनीय
– जनता पर पुलिस का बल प्रयोग ठीक नहीं
– आठ गेट बनाये, लेकिन एक गेट से ही प्रवेश पर सवाल
ग्वालियर। ग्वालियर में नये बने श्रीमंत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम में रविवार की रात को मध्यप्रदेश लीग 2024 के फाइनल मैच को देखने पहुंची जनता के साथ छलावा किया गया। जबकि इस टूर्नामेंट को फ्री फार आल किया गया था। जिससे नये स्टेडियम का प्रचार प्रसार हो सकें और आईसीसी तक इस स्टेडियम की धाक पहुंच सकें। लेकिन बीती रात आयोजकों द्वारा की इस लीग के फाइनल मैच में की गई अव्यवस्थाओं के चलते आईसीसी तक क्या मैसेज गया होगा, यह तो आयोजक ही जानें। परंतु वर्षों से इंटरनेशनल मैच की राह देख रहे ग्वालियर को जरूर आयोजकों की अव्यवस्था व मिस मैनेजमेंट धक्का पहुंचा सकता है।
उल्लेखनीय है कि बीती रात श्रीमंत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम में एमपीएल का फाइनल मैच खेला गया था। मैच को देखने के लिए रविवार के दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे इसके बाद एंट्री बंद कर दी गई। रात 8.30 बजे स्टेडियम के बाहर बड़ी संख्या में भीड़ जमा होने लगी और पुलिस ने लोगों को हटाना शुरू कर दिया। लेकिन लोग भी किसी की सुनने के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। मैच देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, कुर्सियां खाली होने के बाद भी एंट्री बंद कर दी गई थी। जिसको लेकर स्टेडियम के बाहर बवाल हो गया। यहां पर बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने आक्रोशित होकर पत्थर फेंकना शुरू कर दिए इसमें एक युवक और एक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
जबकि आपको बता दें कि कोई भी मैच या इवेंट जनता की भीड़ के बिना सफल दिखाई नहीं देता और इस इवेंट को सफल बनाने के लिए भी पूरे शहर और आसपास के शहरों की जनता को फ्री एंट्री का प्रलोभन देकर बुलाया गया था। जितनी ज्यादा भीड़ होती उतना ही ज्यादा खेल के प्रायोजक खुश होते उतना ही ज्यादा खेल के आयोजकों को वाह वाही मिलती। इस क्रिकेट स्टेडियम की क्षमता 30000 दर्शकों की है और जानकारी के मुताबिक लगभग दुगने लोग स्टेडियम तक पहुंच गए थे। लेकिन एक जानकारी यह भी है की स्टेडियम के अंदर आधी सीट खाली पड़ी हुई थी। स्टेडियम के आठ गेट में से केवल एक गेट को जनता के प्रवेश के लिए खोला गया था, बाकी तीन गेट केवल वीआईपी के प्रवेश के लिए खोले गए थे। अब यह तो पढ़े-लिखे आयोजन ही बताएं कि एक गेट से 30000 दर्शकों का प्रवेश कैसे संभव है और यदि संभव है तो फिर इस स्टेडियम में आठ गेट बनाने की फिजूल खर्ची की ही क्यों गई है?
वैसे ग्वालियर की जनता में एक उत्साह नये स्टेडियम को देखने का भी था। परंतु अव्यवस्थाओं ने उसके साथ छलावा कर दिया। इससे ग्वालियर को बदनामी का सामना करना पड़ रहा है। वैसे केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे जो जीडीसीए के उपाध्यक्ष भी है महाआर्यमन सिंधिया की देखरेख में ही यह टूर्नामेंट आयोजित किया गया था। पता चला है कि उनके पास भी मैचों के दौरान अव्यवस्थाओं की शिकायत लगातार पहुंचती रही है। जिसके बाद उन्होंने काफी नाराजगी भी जताई थी। एक सूत्र यह भी बताता है कि पूरे आयोजन की देखरेख के लिये बाहर से स्टाफ बुलाया गया था। जिसके चलते ही यह सब अव्यवस्था फैली है। लेकिन जो भी हो नये स्टेडियम में उदघाटन लीग के दौरान ही हंगामा होना यह शुभ नहीं है। भोलीभाली के साथ इस तरह का व्यवहार यह आयोजकों के माथे पर एक दाग की तरह चुपक गया है। वहीं आईसीसी तक इस अव्यवस्थाओं की रिपोर्ट पहुंचना भी लाजिमी है।
भास्करप्लस.काम

