
– झाबुआ के आनंद भी साइकिल से कर रहे हैं परिक्रमा
(पंकज राजकुमार बंसल)
मध्यप्रदेश में नर्मदा परिक्रमा करने की आस्था अब सैलाब बनती जा रही है। लोग नर्मदा मैया की परिक्रमा पैदल, साइकिल से लेकर दो पहिया वाहन तक से करते है। परंतु पैदल और साइकिल वाले अपनी नर्मदा मैया के प्रति आस्था को लेकर हर संकट की परवाह करे बिना परिक्रमा पूरी कर ही लेते है। वैसे भी सनातन धर्म में नर्मदा परिक्रमा यात्रा का काफी महत्व है पुराणों में कहा गया कि इससे जिंदगी बदल जाती है। नर्मदा को भगवान शंकर के समान नदी के हर कंकड़ में माना जाता है और इसे नर्मदेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है। शिवपुराण व नर्मदा पुराण में भी इस यात्रा का काफी महत्व बताया गया है।
नर्मदा मैया की परिक्रमा के लिये मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु आते है। हर श्रद्धालु अपनी सामथ्र्य और ईच्छानुसार पैदल, साइकिल और वाहन से परिक्रमा लगाता है। हाल ही में कुछ वर्ष पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पैदल ही नर्मदा मैया की परिक्रमा अपने पत्नी के साथ लगाई थी। दिग्विजय सिंह ने परिक्रमा के दौरान समस्यायें भी सुनी थी। वहीं लोगों की परिक्रमावासियों की सेवा के लिये प्रशंसा भी की थी। वहीं अब झाबुआ की टीयर्स कालोनी में रहने वाला युवक आनंद भट्ट अकेले ही साइकिल से नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। श्री भटट ने दो दिसंबर को अमरकंटक के ठंडिया से नर्मदा परिक्रमा यात्रा आरंभ की भी थी। भटट बताते है कि 70 दिन की यह यात्रा है। हर रोज वह 50 से 70 किमी साइकिल चले रहा है। कुल 3200 से 3300 किमी की यह यात्रा है। उनका कहना है कि आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ो तो प्रकृति खुद अनुकूलता प्रदान कर देती है। ईश्वर हर संयोग ऐसे बनाता है कि कोई बाधा भी आती है तो उसका प्रभाव लगभग नगण्य हो जाता है। उन्होंने बताया कि स्वजनों से यात्रा पर निकलने की अनुमति मिलना सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण था। यह चुनौती जब उन्होंने पार कर ली तो यात्रा तो नर्मदा मैय्या करवा ही देती है। उन्होंने कहा कि मौसम जरूर विपरीत है लेकिन श्रद्धा का उफान कही यात्रा को थमने नहीं दे रहा। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ रही है, वैसे आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती जा रही है।
आनंद बताते है कि पूर्व में दो बार कुछ किमी नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर पैदल चलने का अवसर प्राप्त हुआ था। संतों की पैदल यात्रा से उन्हें प्रेरणा मिली। इसके बाद 2022 में कार से नर्मद परिक्रमा की। 15 दिन इस यात्रा में लगे लेकिन सभी जानकारी हो गई। पिछले कुछ दिनों से लगातार इस यात्रा पर निकलने के बारे में सोच रहे थे। आखिरकार उनकी नर्मदा मैय्या ने इच्छा पूर्ण करने के लिए उन्हें बुलावा दे दिया। वे बताते हैं कि परिक्रमा मार्ग पर कोई दिक्कत नहीं होती। सेवाभावी जगह-जगह तमाम व्यवस्था करने लिए आतुर रहते हैं। मौसम कहने को अभी अनुकूल नहीं है लेकिन ईश्वरोप कृपा ऐसी है कि हर बाधा बहुत नगण्य हो जाती है।
आस्था करा ही देती है नर्मदा परिक्रमा, पैदल-साइकिल से भी श्रद्धालु लगा रहे परिक्रमा

