झमेला बना ई-कार्ड, परिवहन विभाग ड्राइविंग व रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने के लिये कर रहा नई कंपनी की खोज

ग्वालियर। परिवहन विभाग में डीएल व आरसी कार्ड बनाने का काम पिछले दो माह से पूरी तरह से बंद हो चुका है, क्योंकि जो कंपनी यह काम करती थी वह भुगतान न किए जाने के कारण काम छोड़कर चली गई है। इसके चलते वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ई-कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सड़क पर ऐसे कार्डो को पुलिस चैकिंग के दौरान मान्यता नही मिलने से चालानी कार्यवाही से लोग परेशान हो रहे है। परिवहन विभाग नई कंपनी की खोज तो कर रही है, लेकिन पुरानी कंपनी को भुगतान न करने की जानकारी होने से नई कंपनी आने को तैयार नहीं हो रही है जिसके चलते पुरानी कंपनी स्मार्ट चिप को काम करने के लिए राजी करने का प्रयास किया जा रहा है।
वाहनों के रजिस्ट्रेशन एवं ड्राइविंग लायसेंस कार्ड बनाने वाली स्मार्ट चिंप कंपनी ने अक्टूबर माह से अपना काम बंद कर दिया था उसके बाद से ही विभाग की चिंता बढ़ी हुई है। प्रदेशभर में स्मार्ट चिप कंपनी द्वारा काम बंद किए जाने से संकट यह है कि आखिर काम किससे कराया जाएं। स्मार्ट चिप कंपनी का विभाग के ऊपर 80 करोड़ से अधिक बकाया है जिसको लेकर लम्बे समय से विवाद चल रहा था ओर बीच में भी कंपनी ने काम बंद कर दिया था, लेकिन भुगतान का आश्वासन मिलने पर कंपनी ने काम शुरू किया था पर आश्वासन पूरा नहीं हो सका था। स्मार्ट चिप कंपनी परिवहन विभाग में पिछले 22 साल से काम कर रही थी। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि काम करने से कोई फायदा नहीं है, क्योकि इससे कंपनी का पैसा फंसता जा रहा है जबकि हमें अपने कर्मचारियो को हर माह वेतन देना पड़ता है।
स्मार्ट चिप कंपनी ने जब काम बंद किया उसके बाद सरकार ने उसका कार्यकाल दिसंबर माह तक बढ़ा दिया था, लेकिन इसके लिए कंपनी के अधिकारियो से किसी तरह की राय नहीं ली गई थी जिसके चलते कंपनी अधिकारियो ने साफ कह दिया था कि काम हमको करना या न करना है तो फिर कार्यकाल बढाने से क्या फायदा द्य जब कंपनी ने काम न करने का निर्णय सुना दिया तो उसके बाद परिवहन विभाग के सामने संकट गहरा गया, क्योंकि उनके पास ऐसे अनुभवी कर्मचारी भी नही है जो यह काम कर सके जिसके कारण ई कार्ड जारी करने का काम शुरू किया गया था, लेकिन यह काम कारगर साबित नहीं हो रहा है। यही कारण है कि अब नए सिरे से नई कंपनी को काम करने के लिए राजी किया जा रहा है। लेकिन डिजीटल युग में काफी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र व गरीब तबकेके पास स्मार्ट मोबाईल नहीं है जिसके कारण उनके पास यह ई कार्ड कैसे पहुंचेंगे। वहीं दूसरी समस्या यह आ रही है कि सड़क पर वाहनों की चैकिंग करने वाले पुलिस अमला ई-कार्ड को मान्य न कर चालानी कार्यवाही करता है, ऐसे में ई कार्ड अब झमेला बनकर रह गया है।