चोरी छिपे बसों में लादा जा रहा मावा, चेक पाइंट पर प्रभावी नहीं नाकाबंदी


ग्वालियर। ग्वालियर समेत चंबल अंचल में दीपावली पर मिलावटी मावा खपाने के लिए मिलावट खोर सक्रिय हो गए हैं। कार्रवाई से बचने के लिए मिलावटखोर शहरी सीमा से 10 से 15 किलोमीटर दूर बसों पर मावा लादकर भोपाल, जबलपुर, इंदौर सहित अन्य जगह भेज रहे हैं। खाद्य सुरक्षा प्रशासन का दावा है कि मिलावटी खाद्य पदार्थ की चेकिंग के लिए 13 पाइंट लगा रखे हैं, लेकिन इन पाइंट पर अब तक मावा व पनीर नहीं पकड़ा जा चुका है। लोडिंग आटो, सवारी आटो समेत रेलवे स्टेशन के पार्सल बुकिंग के पास विभाग मावा पकड़ चुका है। बावजूद इसके ग्वालियर से मावा की सप्लाई नहीं रुक सकी है।
पिछले दो माह की बात करें तो खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारियों ने आधा दर्जन के करीब कार्रवाई की हैं। यह कार्रवाई इस बात की पुष्टि करती है कि मावा दूसरे शहरों में सप्लाई हो रहा है। बसों व रेलवे स्टेशन पर बुकिंग को लेकर बरती जा रही लापरवाही का फायदा मिलावटखोर उठा रहे हैं। यही वजह है कि मिलावटी मावा खपाने का अवैध धंधा ग्वालियर समेत चंबल अंचल में लंबे समय से जारी है। इसे रोकने के लिए प्रशासन की टीम कार्रवाई करती है, लेकिन सफलता के नाम पर मावा कम ही हाथ लगता है। भिंड और मुरैना में संचालित अवैध डेयरियां से रोजाना मावा ग्वालियर पहुंचता है। मुरैना से तो मावे के साथ पनीर की भी सप्लाई होती है। इन जिलों में मावा व पनीर तैयार करने वाले मिलावटखोर बस व रेलवे बुकिंग पार्सल पर सेटिंग जमाकर माल भेजते हैं। यहां बुकिंग की व्यवस्था आधार लिंक न होने के कारण खाद्य पदार्थ भेजने वाले की पहचान नहीं हो पाती। सूचना पर अगर खाद्य सुरक्षा प्रशासन यहां से खाद्य पदार्थ पकड़ भी लेता है तो कार्रवाई करने में दिक्कत होती है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मिलावट रोकने के लिए 13 पाइंट बनाए हैं, लेकिन इन पाइंट पर नाकाबंदी प्रभावी नहीं हो पा रही है। समीपवर्ती जिलों से मिलावटी खाद्य पदार्थ की आवक तो होती है, लेकिन मिलावटखोर चेक पाइंट से पहले ही माल बसों में लाद लेते हैं। अगर उनको ट्रेन के जरिये माल भेजना होता है, तो वह आटो व अन्य छोटे साधनों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि मावा व अन्य खाद्य पदार्थ पकड़े न जाएं।