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मम्मा, जिज्जी, दीदी, भैया, भाभी सब उतरे सियासी समर में

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में आपको उपनामों की भरमार मिलेगी. एमपी पॉलिटिक्टस में नेताओं के उपनामों की तरफ जब रुख करते हैं तो यहां से, भैया-भाभी, दीदी-जिज्जी, दादा-राजा, बाबा-आर्य, केसरी-डग्गी राजा, बन्ना-चतुर्भुज से लेकर मम्मा सभी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. दरअसल ये वो उपनाम हैं जिनसे प्रदेश के कई नेताओं को पहचाना जाता है. प्रदेश के दर्जनों नेता ऐसे हैं जिन्हें उनके वास्तविक नाम के अलावा उपनामों से पहचाना जाता है. इनमें कई नेता ऐसे हैं जिनकी कार्यप्रणाली की बदौलत उनके उपनाम स्थापित हो गए तो वहीं कुछ नाम ऐसे भी हैं जो राजवंश की परंपराओं की देन…

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भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में आपको उपनामों की भरमार मिलेगी. एमपी पॉलिटिक्टस में नेताओं के उपनामों की तरफ जब रुख करते हैं तो यहां से, भैया-भाभी, दीदी-जिज्जी, दादा-राजा, बाबा-आर्य, केसरी-डग्गी राजा, बन्ना-चतुर्भुज से लेकर मम्मा सभी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. दरअसल ये वो उपनाम हैं जिनसे प्रदेश के कई नेताओं को पहचाना जाता है.
प्रदेश के दर्जनों नेता ऐसे हैं जिन्हें उनके वास्तविक नाम के अलावा उपनामों से पहचाना जाता है. इनमें कई नेता ऐसे हैं जिनकी कार्यप्रणाली की बदौलत उनके उपनाम स्थापित हो गए तो वहीं कुछ नाम ऐसे भी हैं जो राजवंश की परंपराओं की देन हैं. वहीं कुछ अपने पिता का नाम अपने नाम के साथ जोड़ने की परंपरा आज भी निभा रहे हैं. आइए आपको रू-ब-रू कराते हैं ऐसे ही कुछ नामों से जिनकी पहचान उनके उपनाम से होती है. खास बात ये कि इन उपनामों में आपको केवल नेता ही नहीं मिलेंगे बल्कि मम्मा से लेकर दादा तक सारे रिश्ते मिल जाएंगे.

गौरीशंकर बिसेन (चर्तुभुज)
बालाघाट से प्रदेश सरकार में कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन अपने नाम के साथ चतुर्भुज लगाना कभी नहीं भूलते. दरअसल चतुर्भुज उनके पिता का नाम है जो वे अपने नाम के साथ जोड़ते हैं.

संजय पाठक (संजय सत्येंद्र पाठक)
कटनी क्षेत्र से राज्य मंत्री रहे संजय पाठक ने बीते दो साल में दो बार नाम बदल लिया. पहले वे संजय पाठक लिखते थे फिर उन्होंने अपने पिता का नाम भी अपने नाम के साथ जोड़ लिया.

कुसुम मेहदेले (जिज्जी)
पन्ना से विधायक और मंत्री कुसुम मेहदेले को अंचल में कई सालों से जिज्जी नाम से बुलाया जाता रहा है. बुंदेलखंड में बहनों को सम्मान स्वरूप जिज्जी कहने की परंपरा रही है, इसी वजह से उनके नाम के साथ भी जिज्जी जुड़ गया है.

अर्चना चिटनीस (दीदी)
बुरहानपुर की ये विधायक अपने गृहनगर में दीदी के संबोधन से बुलाई जाती हैं. साल दर साल दीदी नाम से पुकारे जाने के कारण अब पूरे प्रदेश में ही उन्हें अर्चना दीदी कहा जाने लगा है.

रमेश मेंदोला (दादा दयालु)
विधायक मेंदोला को ये नाम उनके कामों की बदौलत जनता ने दिया है. इंदौर विधानसभा क्रमांक दो से बीजेपी विधायक मेंदोला को क्षेत्र की जनता दादा दयालु नाम से भी जानती है.

उषा ठाकुर (दीदी)
इंदौर क्षेत्र क्रमांक तीन से विधायक उषा ठाकुर प्रारंभिक दौर में संघ से जुड़ी रहीं. वहां महिलाओं को दीदी नाम से संबोधित किया जाता है. यही वजह रही कि उनका नाम दीदी हो गया और अब वह दीदी के नाम से ही जानी जाती हैं.

मालिनी गौड़ (भाभी)
इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 4 से विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ शहर में भाभी नाम से जानी जाती हैं क्योंकि उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत पति के निधन के बाद मिली. इसलिए पूर्व मंत्री लक्ष्मणसिंह गौड़ की पत्नी होने के कारण उन्हें अब भाभी बुलाया जाता है.

महेंद्र हार्डिया (बाबा)
इंदौर के क्षेत्र क्रमांक पांच से बीजेपी विधायक का नाम शुरु से ही बाबा है. राजनीति के शुरुआती दौर में उन्हें कॉलेज में उनके दोस्त बाबा कहकर बुलाते थे. यह निक नेम आज भी उनके नाम के साथ जुड़ा हुआ है.

सुदर्शन गुप्ता (आर्य)
इंदौर के क्षेत्र क्रमांक एक के विधायक यूं तो सुदर्शन कहे जाते हैं, लेकिन वे अपने नाम के आगे हमेशा से आर्य लगाते आए हैं. फिलहाल उन्हें क्षेत्र में टोपीवाला भी कहा जाता है. वे अपने नाम के साथ आर्य लगाना नहीं भूलते.

सुरेंद्र नाथ सिंह (मम्मा)
भोपाल मध्य विधानसभा सीट से विधायक सुरेंद्र सिंह नाथ को ये नाम उनके समर्थकों ने दिया है. कई सालों की राजनीति के बाद वे सुरेंद्र मम्मा ही कहे जाते हैं.

पारुल साहू (केशरी)
सागर के सुरखी से भाजपा विधायक का नाम पारुल साहू है. उनके पति नीरज केशरवानी हैं. इसलिए उन्होंने अपने पति के नाम से अपने नाम के साथ केशरी जोड़ रखा है. हालांकि उन्हें सभी पारुल साहू के नाम से ही जानते हैं.

गोपाल सिंह (डग्गी राजा)
चंदेरी से विधायक गोपाल सिंह अपने नाम के साथ पारिवारिक और राजवंश से प्रेरित नाम डग्गी राजा लगाते हैं. क्षेत्र में उन्हें उनके वास्तविक नाम से कम बल्कि डग्गी राजा नाम से ज्यादा जाना जाता है.

सुशील कुमार (इंदु भैया)
जबलपुर के पनागर से विधायक सुशील कुमार को उनके क्षेत्र के लोग इंदु भैया नाम से जानते हैं. ये उनका पारिवारिक निक नेम है जो उनके नाम के आगे शासकीय रिकॉर्ड में भी स्थाई रूप से जुड़ गया है.

सुखेंद्र सिंह (बन्ना)
मऊगंज से विधायक सुखेंद्र सिंह का नाम भी राजवंश की परंपरा से रखा गया. उन्हें स्थानीय तौर पर बना या बन्ना (राजकुमार) के रूप में जाना जाता है. बना या बन्ना शब्द राजवंश के वारिस के लिये इस्तेमाल होता है जिसे उन्होंने अपने नाम के साथ जोड़ रखा है.

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में आपको उपनामों की भरमार मिलेगी. एमपी पॉलिटिक्टस में नेताओं के उपनामों की तरफ जब रुख करते हैं तो यहां से, भैया-भाभी, दीदी-जिज्जी, दादा-राजा, बाबा-आर्य, केसरी-डग्गी राजा, बन्ना-चतुर्भुज से लेकर मम्मा सभी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. दरअसल ये वो उपनाम हैं जिनसे प्रदेश के कई नेताओं को पहचाना जाता है. प्रदेश के दर्जनों नेता ऐसे हैं जिन्हें उनके वास्तविक नाम के अलावा उपनामों से पहचाना जाता है. इनमें कई नेता ऐसे हैं जिनकी कार्यप्रणाली की बदौलत उनके उपनाम स्थापित हो गए तो वहीं कुछ नाम ऐसे भी हैं जो राजवंश की परंपराओं की देन…

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