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ग्वालियर|25 जुलाई से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाएंगे और हरिशयन काल के साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। इस साल 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरिशयन काल, 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष और 14 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक शुक्र तारा अस्त रहने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन जैसे बड़े मांगलिक कार्यों के लिए कोई मुख्य मुहूर्त उपलब्ध नहीं होंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मुख्य मुहूर्त न होने के बाद भी सनातन धर्म में विशेष परिस्थितियां दी गई हैं। यदि कोई कार्य अति आवश्यक हो, तो व्यक्ति अपनी राशि से ‘चंद्रमा’ की स्थिति (चंद्रबल) देखकर जुलाई में पड़ने वाले सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग जैसे अबूझ व विशेष योगों में मांगलिक व व्यावसायिक कार्य कर सकते हैं।
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