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ग्वालियर| एमआईटीएस (MITS) प्रकरण में जांच एजेंसियों ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अपनी कार्रवाई तेज कर दी है. इस मामले में संस्थान के शीर्ष स्तर पर हुई नियुक्तियों और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके चलते उच्च प्रबंधन पर भी सवाल उठ रहे हैं.
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संस्थान से जुड़े मुख्य विवाद और आरोपों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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- कुलगुरु की कथित अवैध नियुक्ति: मामले में मुख्य आरोप एमआईटीएस के कुलगुरु की नियुक्ति को लेकर है, जिसे नियमों के खिलाफ और अवैध बताया जा रहा है.
- पद का दुरुपयोग: शिकायत के अनुसार, संबंधित अधिकारी द्वारा अपने पद का गलत इस्तेमाल कर कई प्रशासनिक और वित्तीय फैसले लिए गए.
- वित्तीय और ठेकों में धांधली: जांच के दायरे में सरकारी अनुदान (Grants), छात्रों की फीस का प्रबंधन और भवन निर्माण (Building Construction) के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.
- कमर्शियल ठेकों में गड़बड़ी: सिक्योरिटी, मैस (Mess) और कैंटीन के ठेके देने में नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं.
- भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार: संस्थान में की गई अन्य नियुक्तियों और खरीद-फरोख्त (Procurement) में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी के सबूत जांच एजेंसियों को सौंपे गए हैं.
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शिकायतकर्ताओं द्वारा पुख्ता प्रमाण जांच एजेंसियों के सामने पेश किए जाने के बाद अब यह चर्चा तेज है कि संस्थान का उच्च प्रबंधन समय रहते इस पर क्या संज्ञान लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है.
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