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सिंधिया राजपरिवार में संपत्ति बंटवारे के पारिवारिक विवाद में सहमति बनी, फॉर्मूला तैयार?

ग्वालियर| प्रसिद्ध सिंधिया राजघराने का करीब चार दशक पुराना और 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का पारिवारिक विवाद अब आपसी समझौते से पूरी तरह सुलझता नजर आ रहा है।  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं—वसुंधरा राजे सिंधिया (पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान), यशोधरा राजे सिंधिया (पूर्व मंत्री, मध्य प्रदेश), और उषा राजे राणा (नेपाल)—के बीच कई दौर की बैठकों के बाद ऐतिहासिक समझौते का फॉर्मूला तैयार हो चुका है।

देश के सबसे संपन्न और चर्चित राजघरानों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार का करीब 40 वर्षों से चला आ रहा संपत्ति विवाद आपसी समझौते से सुलझ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआओं—वसुंधरा राजे सिंधिया (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री), यशोधरा राजे सिंधिया (पूर्व मंत्री, मप्र) और उषा राजे राणा (नेपाल) व अन्य पक्षों के बीच अरबों रुपये की विरासत के बंटवारे के फॉर्मूले पर पूर्ण सहमति बन चुकी है। इस महा-समझौते के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से ग्वालियर जिला न्यायालय में आवेदन (राजीनामा) पेश कर दिया गया है, जिसकी औपचारिक प्रक्रिया 8 जुलाई 2026 को कोर्ट में पूरी की जाएगी। अरबों की संपत्तियों के बंटवारे का मुख्य आधार “जो जहां काबिज, वो संपत्ति उसी की” रखा गया है। इसके तहत, वर्तमान में जिस संपत्ति पर जिसका कब्जा है, वही उसका अंतिम मालिक होगा, चाहे कागजात किसी भी ट्रस्ट के नाम हों। इस निर्णय से दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर में चल रहे एक दर्जन से अधिक कानूनी मामले खत्म हो जाएंगे।

 संपत्तियों का बंटवारा
  • मुख्य धरोहरें: ग्वालियर का जय विलास पैलेस और ऊषा किरण पैलेस प्रमुख विरासत के तौर पर मुख्य पक्ष (ज्योतिरादित्य सिंधिया) के पास रहने की संभावना है।
  • अन्य संपत्तियां: दिल्ली, मुंबई और पुणे में स्थित कोठियां व बंगले वर्तमान कब्जे (Possession) के आधार पर संबंधित पक्षों के पास रहेंगे।
  • विशेष: एक प्रमुख पन्ने का दिव्य शिवलिंग, जो वसुंधरा राजे के पास था, वह अब ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास रहने की संभावना है।
कोर्ट की कार्यवाही और अंतिम मुहर
  • तारीख और सुनवाई: इस आपसी राजीनामे (समझौते) पर औपचारिक मुहर लगाने की प्रक्रिया 8 जुलाई को कोर्ट में पूरी होगी
  • उपस्थिति: सभी पक्ष (ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआएं) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से न्यायालय के सामने पेश होंगे।
  • मुकदमों का अंत: इस समझौते के बाद दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अलग-अलग अदालतों में पिछले कई सालों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो जाएगा। 
विवाद की पृष्ठभूमि (क्या था पूरा मामला?)
  • शुरुआत (2010): कानूनी तौर पर इस लड़ाई की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब तीनों बुआओं (उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे) ने ग्वालियर जिला कोर्ट में केस दायर किया था 
  • बुआओं का पक्ष: उनका कहना था कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पिता (दिवंगत महाराजा जीवाजीराव सिंधिया) की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी बेटों के बराबर वैधानिक अधिकार है।
  • भतीजे (ज्योतिरादित्य) का पक्ष: ज्योतिरादित्य सिंधिया का तर्क था कि राजघराने की संपत्ति पर ‘प्राइमोजेनीचर’ (ज्येष्ठाधिकार) का नियम लागू होता है, जिसके तहत पूरी विरासत बड़े बेटे (दिवंगत माधवराव सिंधिया) को मिलती है।
  • ट्रस्ट और कंपनियां: इस विवाद में सिंधिया परिवार के 13 प्रमुख ट्रस्ट (जैसे जय विलास ट्रस्ट, बलदेव इन्वेस्टमेंट, कृष्णा राम) और आजादी के समय की कई कंपनियों के शेयर भी शामिल थे
समझौते के दायरे में आई प्रमुख संपत्तियां
इस पारिवारिक बंटवारे के फॉर्मूले में देश के अलग-अलग शहरों में स्थित राजघराने के कई ऐतिहासिक महल, कोठियां, ट्रस्ट और कीमती जमीनी संपत्तियां शामिल हैं:
 ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत 


जय विलास पैलेस

करीब 12.40 लाख वर्गफीट में फैला 400 कमरों का भव्य मुख्य महल।


ऊषा किरण पैलेस होटल