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ग्वालियर। ग्वालियर व्यापार मेले का प्रदर्शनी सेक्टर बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। मेले में ठेलों पर किस प्रकार कार्रवाई होती है प्रदर्शनी सेक्टर उसका उदाहरण है। सरकारी विभागों की प्रदर्शनियों के बीच सुबह से रात तक ठेले लगे रहते हैं। प्रदर्शनी सेक्टर के हालात यह हैं कि ठेलों पर तो सैलानियों की भीड़ नजर आती है लेकिन प्रदर्शनियां सैलानियों की राह देखती रहती हैं। जिस सेक्टर में विभिन्न सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं और जागरूकता से जुड़ी प्रदर्शनियों के माध्यम से आमजन को सैलानियों दी जानी थी, वह इलाका वीरान नजर आ रहा है। हालत यह है कि प्रदर्शनियों के भीतर दर्शक नहीं हैं, जबकि बाहर ठेले वाले और फुटपाथी पूरे इलाके पर कब्जा जमाए बैठे हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला लालटिपारा आदर्श गौशाला की प्रदर्शनी से जुड़ा है। गौशाला की प्रदर्शनी में प्रतीक के रूप में रखी गई बैलगाड़ी को ही फुटपाथी दुकानदार ने दुकान में तब्दील कर दिया है। बैलगाड़ी पर सामान रखकर बिक्री की जा रही है, जिससे प्रदर्शनी का उद्देश्य ही मजाक बनकर रह गया है। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि गौशाला जैसी संवेदनशील संस्था के प्रति असम्मान भी उजागर कर रहा है।
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प्रदर्शनी सेक्टर में प्रवेश करते ही अव्यवस्था साफ नजर आती है। प्रदर्शनियों के गेट के ठीक सामने फुटपाथियों की दुकानें सजी रहती हैं। कहीं चाट-पकौड़ी के ठेले खड़े हैं तो कहीं खिलौने और कपड़ों की दुकानें सज गई हैं। हालात यह हैं कि दर्शक जब प्रदर्शनी के गेट तक पहुंचते हैं तो अतिक्रमण देखकर वापस लौट जाते हैं। प्रदर्शनी सेक्टर की सड़क पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। सड़क पर चाट और खाने-पीने के ठेले बेतरतीब ढंग से खड़े रहते हैं। कहीं-कहीं तो पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती है। किसी आपात स्थिति में वाहन या एम्बुलेंस का पहुंचना मुश्किल हो सकता है। यहां विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियां लगी हैं, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पशुपालन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। लेकिन दर्शकों की कमी के चलते ये प्रदर्शनियां केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। कई स्टॉल पर कर्मचारी खाली बैठे रहते हैं, तो कुछ जगहों पर स्टॉल लगभग बंद जैसे नजर आते हैं। प्रदशर्नियों के उद्घाटन के बाद से ही यहां पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सैलानियों का कहना है कि जब सरकारी विभाग की प्रदर्शनियों का ही यह हाल है तो बाकी मेले की स्थिति समझी जा सकती है। यहां पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक नहीं होती।
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