भाजपा संगठन से सिंधिया की दूरी चर्चा में?

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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके समर्थकों को भाजपा में आए पांच साल हो गए हैं। इन वर्षों में पार्टी भले ही ज्योतिरादित्य समर्थकों के भाजपा में घुल-मिल जाने का दावा करे लेकिन उनके समर्थक मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों से तो स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है।

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मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्रांति शुरू करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष घोषित कर रखा है। इसी फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने यहां के मंच से दुनिया भर के निवेशकों को मध्य प्रदेश आने का न्योता भी दिया, लेकिन मोहन सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ही ग्वालियर क्षेत्र को उद्योग न मिलने से नाराज चल रहे हैं। ज्योतिरादित्य समर्थक प्रद्युम्न सिंह ने ग्वालियर के साथ अन्याय का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां जितने उद्योग मिलने चाहिए, नहीं दिए जा रहे हैं। वहीं सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने एक कार्यक्रम में कहा कि आप (ज्योतिरादित्य) भले ही गुना-शिवपुरी के सांसद हैं लेकिन औद्योगिक विकास के लिए आपको ग्वालियर की तरफ देखना ही पड़ेगा। उद्योगों की मांग से ज्यादा इन बयानों के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं।
दरअसल, विजयपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद से ज्योतिरादित्य ने पार्टी संगठन और सरकार से दूरी बनाकर रखी है, वही संगठन और सरकार भी ज्योतिरादित्य को अपेक्षित महत्व देते नहीं दिखाई दे रहे। ज्योतिरादित्य भोपाल आते भी हैं, तो संगठन नेताओं को छोड़ बाकी सभी बड़े नेताओं से मिलते हैं। ऐसे में प्रद्युम्न सिंह के बयान के अलग ही मायने हैं। उन्होंने तो यहां तक कहा कि ग्वालियर को पुन: औद्योगिक नगरी बनाने की मांग को लेकर मैं ज्योतिरादित्य के दरवाजे पर पर बैठूंगा।

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प्रद्युम्न सिंह का बयान संकेत दे रहा है कि ग्वालियर के विकास के बहाने ज्योतिरादित्य सिंधिया की उपेक्षा अब सतह पर आ गई है। इससे पहले भाजपा संगठन में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर भी ज्योतिरादित्य समर्थकों के नामों को लेकर कई जिलों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। नतीजा यह हुआ कि जो नाम कुछ दिनों में घोषित हो जाने थे, उसमें कई हफ्ते लग गए। संगठन ने यह मामला किसी तरह संभाल लिया था, लेकिन प्रद्युम्न सिंह के बयान के बाद सरकार को लेकर ज्योतिरादित्य समर्थकों की नाराजगी सार्वजनिक हो गई है।

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