
ग्वालियर। ग्वालियर में संचालित पैथोलॉजी सहित अन्य लैब और जांच केंद्रों पर डाक्टरों का कमीशन का खेल चल रहा है। डॉक्टर जिस सेंटर या लैब पर जांच की सलाह देते हैं, उसके अलावा दूसरी जगह की रिपोर्ट स्वीकार नहीं करते। वजह साफ है, डॉक्टर, लैब और जांच केंद्रों के बीच कमीशनबाजी। सूत्रों के अनुसार लैब और जांच केंद्र शहरभर के डॉक्टर्स को करोड़ों रुपए सालाना कमीशन पहुंचाते हैं। जबकि इंडियन रेडियोलोजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन ने रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी जांचों के बदले डॉक्टर्स को दिए जाने वाले कमीशन या इंसेंटिव पर रोक लगा रखी है। यही नहीं दवाओं में भी कमीशन का खेल चल रहा है।
गौरतलब है कि शहर में हर साल बड़ी संख्या में पैथोलॉजी और रेडियोलोजिकल जांचें होती हैं। मरीज जैसे ही डॉक्टर के पास जाता है, वह कई जांचें लिखता है। इसके साथ अधिकतर डॉक्टर लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर भी बताते हैं। यदि दूसरी लैब से जांच कराई तो डॉक्टर उसे नहीं मानते। फिर मरीज कभी दूसरे डॉक्टर के पास जाता है तो नए सिरे से सभी जांचें कराई जाती हैं। इसके पीछे कमीशन का खेल ही रहता है। पैथोलॉजी और रेडियोलोजिकल जांचों जिनमें ब्लड टेस्ट से लेकर एक्स-रे, सोनोग्राफी, सीटी-स्कैन और एमआरआई शामिल हैं में 20 से लेकर 40 प्रतिशत तक इंसेंटिव डॉक्टर्स को दिया जाता है। जांच सेंटर पर सबसे पहले रेफर करने वाले डॉक्टर का नाम पूछा जाता है। यही नहीं जांच सेंटरों ने आसपास के जिलों में ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टर्स से भी सेटिंग कर रखी है। यही नहीं दवाओं में भी कमीशन का खेल चल रहा है। हर डाक्टर के क्लिनिक और निजी अस्पतालों में ही मेडीकल स्टोर भी खोल दिये गये है। डाक्टर दवा ही ऐसी लिखता है जो उनके क्लिनिक और अस्पताल के मेडीकल स्टोर में ही मिलती है। अगर मरीज बाहर से दवा लेने जाता है तो उसे नहीं मिलती।
दवा और जांच में कमीशन का खेल, हर डॉक्टर के तय हैं जांच सेंटर?

