
ग्वालियर। दिल्ली की आवोहवा बिगड़ने के बाद यह हवा अब ग्वालियर के मिजाज को भी बिगाड़ने लगी है। वायु गुणवत्ता के खराब होने की रफ्तार को देखते हुए राजधानी में बैठे अफसर भी चिंतित हैं और उन्होंने अब संबंधित जिलों के अधिकारियों को माइक्रो लेवल एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उस एक्शन से जल्द अवगत कराने को भी कहा है। शहर में प्रदूषण इस समय खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है, जिसके चलते लोगों को मास्क लगाकर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
शहर के विकास के नाम पर जिन सड़कों को डस्ट फ्री बनाया जाना बताया गया, वहां अब भी धूल के गुबार उड़ते देखे जा सकते हैं। सीएनडी वेस्ट प्लांट भी कोई खास काम नहीं आया है। हालत यह है कि सिटी सेंटर और महाराज बाड़े पर पीएम 2.5 का स्तर 100 से अधिक है। पीएम – 10 भी 200 से ज्यादा है। ग्वालियर में यह स्थिति लगभग एक माह से है, जिसके कारण शहरवासियों को खराब हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। शहर की आवोहवा को लेकर पहले भी डब्ल्यूएचओ अपनी रिपोर्ट में ग्वालियर के अफसरों को चेता चुका है, लेकिन उस चेतावनी के बाद भी सुधार के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए गए, बल्कि हवा को बिगाड़ने का काम जरूर किया जा रहा है। इस समय शहर भर में सड़कों से उड़ने वाली धूल हवा को और बिगाड़ने का काम कर रही है। सर्द मौसम होने के कारण व शरीर से धूल चिपक तो रही ही है, साथ ही सांस लेते समय शरीर के अंदर भी जा रही है।
प्रदूषण को थामने में पेड़ो की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, लेकिन जिस तेजी से शहर का विस्तार हो रहा है और आबादी बढ़ने से रिहायसी कॉलोनियां बन रही हैं उसके चलते पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, जो पहाड़ थे उन पर भी अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए हैं। कहने को तो अतिक्रमण रोकने के लिए प्रशासन तंत्र के पास कई हाथ हैं, लेकिन सफेदपोशों के आगे यह हाथ आगे नहीं बढ़ पाते। हरियाली महोत्सव के नाम पर पौधे रोपने के अभियान तो चलते हैं, पर पौधों को बचाने का प्रयास नहीं होता। वहीं शहर के बिगड़ते पर्यावरण को लेकर मुख्य सचिव खासे चिंतित है और उन्होंने वायु गुणवत्ता सुधार के लिए माइक्रो लेवल एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं।
ग्वालियर की आवोहवा बिगड़ी, लोग मास्क लगाकर चलने को मजबूर

