अपना स्मार्ट शहरः बिना प्लानिंग के काटी जा रही नई कॉलोनियां, नालों पर इमारतें

ग्वालियर। शहर को स्मार्ट बनाने के नाम पर करोड़ों की राशि खर्च की जा रही है। लेकिन मानसूनी बारिश ने निगम प्रशासन की जो पोल खोली है, उससे स्पष्ट हो गया कि शहर में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टेट समय के जो नाले पानी निकासी के लिए बने हुए थे, उन पर इमारतें तन गई हैं, जिसके चलते बारिश के दौरान शहर के कई इलाकों में घरों के अंदर तक पानी भर गया। यह नजारा ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी देखा है, क्योंकि वह कमर तक भरे पानी में जनता की मदद के लिए पहुंचे थे। अब समझ सकते हैं कि शहर का विकास किस तरह और किस दिशा में किया जा रहा है।
शहर में नाले से लेकर नालियों की सफाई करने में करोड़ों की राशि खर्च की जाती है फिर घरों में पानी कैसे भर गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हालात यह हैं कि मौसम बदलने के साथ ही इस बात को भुला दिया जाता है कि पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था कैसे की जाए, जिससे आगे लोगों के घरों में पानी न भरे और उनको राहत शिविर की शरण न लेना पड़े। शहर में जुलाई के बाद मानसून सक्रिय हो जाता है, लेकिन नालों की सफाई के लिए सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। शहर में हर वर्ष जलभराव की समस्या से निपटने करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद इस परेशानी का हल नहीं निकलता। दिखता है कि योजना बनाने की अधिकारियों में कमी है। जिसका परिणाम यह है कि जरा सी बारिश होने से ही शहर की सड़कें व निचले इलाके जलमग्न हो जाते हैं। स्टेट समय पर शहर में पानी निकासी के लिए बेहतर काम किया गया था। उसके चलते करीब 486 छोटे-बड़े नाले बनाए गए थे, जिससे जलभराव की समस्या नहीं आती थी। समय बदलने के साथ विकास के लिए शहर को स्मार्ट बनाने का काम हो रहा है, लेकिन जो नाले थे, उन पर कब्जे की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया ।
शहर के आसपास बिना प्लानिंग के नई कॉलोनियां काटी जा रही है, जिससे पानी निकासी के जो रास्ते थे, वह पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। साल 2001 में शहर की जनसंख्या 16 लाख की करीब थी जो वर्ष 2011 में कराई गई गणना के बाद 20 लाख 32 हजार 36 तक पहुंच गई थी। अब उस गणना को 13 साल हो चुके हैं तो समझ सकते है कि वर्तमान में जनसंख्या का आंकड़ा 27 से 30 लाख के करीब पहुंच गया होगा। पानी निकासी के जो स्त्रोत थे उन पर अतिक्रमण हो गया, जिसको लेकर शिकायतें भी होती रही है, लेकिन कार्रवाई न होना यह दिखाता है कि इस तरफ से जिम्मेदार आंख बंद किए रहते हैं।