आंबेडकर प्रतिमा विवाद के बहाने भीम आर्मी और आजाद पार्टी का फिर जड़ें जमाने का प्रयास ?

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के विवाद को लेकर भीम आर्मी और आजाद पार्टी जैसे संगठन ग्वालियर-चंबल अंचल में अपनी जड़ें जमाने के प्रयास में हैं। 2018 में एट्रोसिटी एक्ट के नाम पर हुए जातीय संघर्ष के करीब सात वर्ष बाद अंचल में फिर तनावपूर्ण माहौल है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा प्रतिमा स्थापना के समर्थन में बयान देकर प्रदेश की राजनीति को गर्माने का प्रयास किया गया है।

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उप्र की सीमा से सटे होने के कारण अंचल में जातिगत राजनीति को आश्रय अवश्य मिलता रहा है, लेकिन यहां के मतदाताओं ने इन दलों को कभी अपने वोट की ताकत देकर सत्ता तक नहीं पहुंचाया है। आंबेडकर के नाम पर ग्वालियर-अंचल में राजनीति नई बात नहीं है। इससे पहले भी बाबा साहेब के नाम पर राजनीतिक विवादों ने तूल पकड़ा है। पहली बार जातिगत राजनीति का केंद्र उच्च न्यायालय परिसर बना है। प्रशासन का भी मानना है कि उच्च न्यायालय में संविधान निर्माता बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने का मामला न्यायालय परिसर का आंतरिक मामला है।

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पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कैत के साथ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक भी हो चुकी है। विवाद की स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय में परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने के मामले को स्थगित कर दिया गया है, लेकिन भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी इस मामले को तूल देने का प्रयास रही है। दोनों ही दलों ने 16 जून को ग्वालियर में डॉ. आंबेडकर के नाम पर महापंचायत करने का एलान किया है। भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बरेसिया और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रविंद्र भाटी सक्रिय हैं।

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