अचलनाथ मंदिर में निर्माण कार्य अधूरे, लोकार्पण करके भूले जिम्मेदार


ग्वालियर। शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र अचलनाथ मंदिर के लोकार्पण के बाद जिम्मेदार भूल ही गए हैं। लोकार्पण हुए दो माह पूरे हो गए लेकिन शेष काम कब होंगे, पता नहीं। मंदिर के शिखर स्थापना से लेकर विद्युत सज्जा का कार्य अब भी अधर में लटका हुआ है। वाटर हार्वेस्टिंग सहित अन्य कार्य भी होने हैं। मंदिर में व्यवस्थित बिजली की फिटिंग तक नहीं है, जिससे गर्भगृह तक में अंधेरा छा जाता है। सबसे ज्यादा परेशान शाम ढ़लने के बाद आने वाले श्रद्धालु होते हैं।
बिजली गुल होने की स्थिति में श्रद्धालु असुरक्षित हो जाते हैं, अंदर अंधेरा बाहर अंधेरा,कोई वारदात हो जाए तो सब भगवान भरोसे। लोकार्पण के समय मंदिर संचालन समिति ने दावा किया था कि 15 दिन शेष बचे कार्य पूर्ण हो जाएंगे, वे 15 दिन अभी तक पूरे नहीं हुए। अचलेश्वर मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2017 में शुरू हुआ था। तीन करोड़ 11 लाख रुपये लागत में एक वर्ष में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होना था। न्यास में उपजे विवाद और कोरोना संक्रमण के कारण सात वर्ष में मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। कोर्ट ने न्यास को भंग कर मंदिर संचालन का दायित्व जिलाधीश को सौप दिया। जिलाधीश ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एनके मोदी की अध्यक्षता मंदिर संचालन समिति का गठन कर दिया। इस समिति एसडीएम से लेकर नगर निगम, पुलिस व कोषालय के अधिकारी शामिल हैं। समिति के गठन के बाद निर्माण ने गति पकड़ी और श्रावण मास में मंदिर का लोकार्पण भी कर दिया गया।
मंदिर के शिखर पर कलश की स्थापना होनी है। मंदिर संचालन समिति ने पुराने कलश की साफ-सफाई कर कान्टेक्टर को लगाने के लिए सौप दिया है, लेकिन कलश की स्थापना आज तक पूर्ण नहीं हो पाई। मंदिर की सुंदरता बढ़ाने के लिए फसाड लाइट से विद्युत सज्जा होनी थी, जो कि आज तक नहीं हो पाई है। गर्भगृह में चारों तरफ टपक रहा पानी मंदिर के गर्भगृह में पहली मंजिल से चारों तरफ बारिश का पानी टपक रहा है।जिसके कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। पूजा करते समय पानी टपकने से ध्यान भंग होता है।