
ग्वालियर। आधुनिक तकनीक जीआइएस पर आधारित 132 केवी विद्युत सब स्टेशन (गैस इंसुलेटेड स्विच गियर सब-स्टेशन) तक मोनोपोल लाइन के रूट को लेकर असमंजस बरकरार है। अब तक ऊर्जा विभाग के अफसर रूट तय नहीं कर पाए हैं। जिससे मोनोपोल लाइन के लिए टावर खड़े करने में देरी हो रही है। एक सब स्टेशन का काम एक साल से ज्यादा समय में पूरा नहीं हो सका और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर 132 केवी के दो नए सब स्टेशन बनाने की बात कर रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री तोमर ने अटके पड़े 132 केवी सब स्टेशन को लेकर यह बात जरुर कही है कि दिसंबर-जनवरी में इसे शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन मोनोपोल टावर खड़े किए जाने के लिए जगह नहीं मिलने के मामले को लेकर वह टाल गए। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को फूलबाग स्थित 132 केवी के सब स्टेशन निर्माण को लेकर शुरू से ही बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्ष 2023 में इसका भूमिपूजन किया था, लेकिन मोनोपोल लाइन के टावर खड़े करने में सिंधिया ट्रस्ट ने ही आपत्ति ही ली है। इस कारण पावर ट्रांसमिशन कंपनी को लाइन का रूट बदलने के लिए विवश होना पड़ा है। हालांकि मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के अफसरों के साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर बाधाओं को जल्द दूर करने का दावा कर रहे हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी को 18 माह में इस प्रोजेक्ट को पूरा करना था। तय समय के अनुसार दिसम्बर 2023 में काम पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन 2024 अगस्त में भी काम अटका पड़ा है।
इस विद्युत सब स्टेशन से फूलबाग, हजीरा, सेवानगर, तानसेन नगर, लोहामंडी, कांचमिल, औद्योगिक क्षेत्र, प्रेमनगर, आरपी कालोनी, किलागेट, पड़ाव, शिंदे की छावनी, गांधी नगर, सिटी सेंटर, बसंत बिहार, माधवनगर, अनुपम नगर, चेतकपुरी सहित अन्य इलाकों की बड़ी आबादी को फायदा होगा, लेकिन प्रोजेक्ट के काम में देरी होने से आबादी को ट्रिपिंग व फाल्ट की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके साथ ही जगह जगह से गुजरने वाली 33 केवी लाइनों की लंबाई कम होगी जिससे वोल्टेज सही मिलेगा।

