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गुना। मध्य प्रदेश की राजनीति में गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र एक बार फिर सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक रूप लेती दिखाई दे रही है। केंद्रीय मंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया गुना दौरे के बाद पार्टी के वरिष्ठ विधायक पन्नालाल शाक्य के तीखे बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे के दौरान विधायक पन्नालाल शाक्य किसी भी सरकारी कार्यक्रम या संगठनात्मक बैठक में नजर नहीं आए। उनकी अनुपस्थिति पहले ही कई तरह की अटकलों को जन्म दे चुकी थी, लेकिन इसके बाद दिए गए उनके बयान ने यह संकेत दे दिया कि क्षेत्रीय भाजपा में सब कुछ सामान्य नहीं है।
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मीडिया से बातचीत में विधायक शाक्य ने बिना नाम लिए सिंधिया के आसपास मौजूद लोगों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े नेताओं को चुगलखोरों और चापलूसों से सावधान रहना चाहिए। उनका कहना था कि जब कोई नेता ऐसे लोगों के प्रभाव में आ जाता है तो सही और गलत की जानकारी उस तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा अपने वरिष्ठ नेताओं को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन यदि गलत लोग हावी हो जाएं तो किसी को भी लंबे समय तक बचा पाना मुश्किल हो जाता है। विधायक ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि कुछ अधिकारी वास्तविक हालात छिपाकर वरिष्ठ नेताओं के सामने अलग तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने खाद संकट के दौरान हुई एक महिला की मौत का उदाहरण देते हुए दावा किया कि घटना की वास्तविक वजह को छिपाकर दूसरी कहानी प्रस्तुत की गई, जिससे नेतृत्व तक सही जानकारी नहीं पहुंच सकी।
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पन्नालाल शाक्य ने अपने हालिया कार्यक्रमों से दूरी को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना भी जरूरी है। केवल नेताओं और मंत्रियों के कार्यक्रमों में शामिल रहने से जनता और परिवार दोनों के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं हो सकता। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद गुना-शिवपुरी क्षेत्र में भाजपा के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के समर्थकों के बीच मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में विधायक का यह सार्वजनिक बयान संगठन के भीतर मौजूद असंतोष को और स्पष्ट करता है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से बयानबाजी तेज हुई है, उससे यह संकेत जरूर मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और अधिक गर्मा सकती है..
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