– एक या दो दिन छोड़कर पानी सप्लाई करने का प्रस्ताव तैयार
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ग्वालियर| शहर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही गहराते जल संकट को देखते हुए नगर निगम अब एक दिन या दो दिन छोड़कर पानी की सप्लाई करने की तैयारी में है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर की जीवनदायिनी कहे जाने वाले तिघरा बांध में अब केवल 90 दिन का पानी (लगभग 3 महीने का स्टॉक) शेष बचा है| विभागीय अधिकारियों ने नगर निगम को पत्र लिखकर अल-नीनो प्रभाव के चलते इस वर्ष कम बारिश होने की आशंका भी जताई है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है।
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वर्तमान स्थिति और संकट के मुख्य आंकड़े
- घटता जलस्तर: तिघरा डैम का वाटर लेवल तेजी से गिरकर 727.9 फीट पर पहुंच गया है, जो इसकी कुल क्षमता का महज 44.8 प्रतिशत है।
- दैनिक खपत: शहर में प्रतिदिन लगभग 12.79 से 12.90 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) पानी की सप्लाई तिघरा से की जा रही है।
- डेडलाइन: यदि पानी की निकासी इसी गति से जारी रही तो तिघरा से केवल 16 जुलाई तक ही नियमित सप्लाई संभव हो पाएगी।
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नगर निगम का नया प्रस्ताव और व्यवस्थाएं
- वैकल्पिक दिन सप्लाई: वर्तमान व्यवस्था को बदलकर एक या दो दिन छोड़कर (अल्टरनेट डे) पानी सप्लाई करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। निगमायुक्त इस प्रस्ताव को मेयर इन काउंसिल (MIC) और परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखेंगे।
- निजी टैंकरों की तैनाती: संकटग्रस्त और अंतिम छोर वाले इलाकों (जैसे रामनगर, पंचशील नगर, गिरवाई) के लिए नगर निगम ने 30 निजी टैंकर किराए पर लेने की मंजूरी दी है, जबकि 52 सरकारी टैंकर पहले से ही संचालित हैं।
- चूड़ियों की संख्या बढ़ाई: डैम का लेवल कम होते ही जल संसाधन विभाग ने पानी खींचने के लिए चूड़ियों की संख्या 34 से बढ़ाकर 36 कर दी है।
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जनता और पार्षदों का बढ़ता आक्रोश
पानी की कमी और लो-प्रेशर की समस्या को लेकर शहरवासियों में गुस्सा बढ़ रहा है। हाल ही में नगर निगम परिषद की बैठक के दौरान वार्ड-1 की पार्षद धरने पर बैठ गईं, वहीं वार्ड-2 की महिला पार्षद ने विरोध स्वरूप मटका फोड़कर अपना विरोध दर्ज कराया। वार्ड 22, 27, 29, 38, 39, 42, 49, 54, 55, 58 और 59 जैसे क्षेत्र पानी की किल्लत से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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पानी की बर्बादी भी बड़ी वजह
एक तरफ शहर बूंद-बूंद को तरस रहा है, वहीं दूसरी ओर पीएचई (PHE) विभाग की लापरवाही के कारण नाका चंद्रबदनी, बिरलानगर, हजीरा, थाटीपुर, सेवानगर, महलगांव और शिवाजी नगर जैसे मुख्य इलाकों में पाइपलाइन लीकेज से रोजाना लाखों लीटर पानी सड़कों पर बह रहा है।
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