ग्वालियर| रेलवे बोर्ड यात्रियों को किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। झांसी रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों झांसी, ग्वालियर, दतिया, डबरा और मुरैना पर इन दिनों एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है। यात्रा करने वाली आम जनता अपने हक का किफायती भोजन यानी जनता खाना ढूंढने से भी नहीं मिल पा रहा है। रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर छोटे-बड़े स्टेशन के खान-पान स्टॉलों पर 15 रुपए वाला जनता खाना अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। इसके बावजूद महीनों से इन स्टेशनों के वेंडर इस नियम को ठेंगा दिखा रहे हैं और रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
इन सभी स्टेशनों पर आम दिनों में जनता खाना न के बराबर मिलता है। लेकिन जब भी किसी रेलवे अधिकारी का निरीक्षण (विंडो ट्रेलिंग या इंस्पेक्शन) होना होता है, तो इन स्टॉलों पर अचानक जनता खाना स्ट्रॉल पर दिखाई देने लगता है। इस तमाशे की पूरी जानकारी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी है, लेकिन इन वेंडरों पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं।
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जनता खाना में मेन्यू और वजन का यह है नियम
- पूरी -175 ग्राम
- सब्जी (आलू)- 150 ग्राम
- अचार -15 ग्राम
- कुल वजन – 340 ग्राम
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