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ग्वालियर| निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड पर 16 अप्रैल (गुरुवार) की दोपहर तक सब कुछ ठीक चल रहा था. गार्डर को ऊपर सेट करने का काम किया जा रहा था. तभी अचानक बैलेंस बिगड़ा और भारी-भरकम गार्डर नीचे गिर गया. तेज आवाज आई, जैसे कोई धमाका हुआ हो. लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही कार्यस्थल पर हड़कंप मच गया. बाद में पता चला कि गार्डर गिरा है.
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ग्वालियर एलिवेटेड हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक तेज आवाज के साथ गार्डर गिरा. जोरदार आवाज से आसपास के लोग भयभीत हो गए. गार्डर को सेट करने में जुटा एक श्रमिक दूसरी साइड में गिर गया, जिससे वह घायल हो गया. साथी श्रमिकों ने उसे तुरंत ग्वालियर के अस्पताल में पहुंचाया. उसके सिर में चोट आई है. बता दें कि ग्वालियर एलिवेटेड रोड को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते रहे हैं. कुछ दिन पहले ही वे इसके निर्माण कार्य का जायजा लेने पैदल पहुंचे थे. दो चरणों में बनने वाले इस एलिवेटेड रोड का पहला चरण करीब 1300 करोड़ रुपये की लागत का है. गुरुवार को यह हादसा खेड़ापति हनुमान मंदिर के पास हुआ. यहां रोज श्रद्धालु पहुंचते हैं. गार्डर उसी पुलिया पर गिरा, जिससे पुलिया का एक हिस्सा भी टूट गया. गनीमत यह रही कि निर्माण कार्य के चलते उस पुलिया से आवागमन एक दिन पहले ही बंद करा दिया गया था.

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स्वर्णरेखा प्रोजेक्ट क्या है?
ग्वालियर में स्वर्णरेखा नाले के ऊपर बन रही यह एलिवेटेड रोड मध्य प्रदेश का पहला ऐसा कॉरिडोर है, जो किसी नदी या नाले के ऊपर बनाया जा रहा है. इसे दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब ₹1300 करोड़ है.
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परियोजना एक नजर में
कुल लंबाई: 13.85 किमी (जलालपुर तिराहा से गिरवाई तक)
चौड़ाई: 19.5 मीटर
कैरिजवे: 9-9 मीटर की दो सड़कें (4-लेन) और 1.5 मीटर डिवाइडर
पिलर और गर्डर: 293 पिलर और लगभग 108 गर्डर
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दो चरणों में निर्माण
फेज-1: 6.5 किमी (जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि तक), लागत ₹447 करोड़
फेज-2: 7.42 किमी (लक्ष्मीबाई समाधि से गिरवाई तक), लागत ₹926 करोड़
अन्य प्रमुख विशेषताएं
कुल 14 एंट्री-एग्जिट लूप
प्रमुख स्थान: गिरवाई, फूलबाग, रामदास घाटी, शिंदे की छावनी
पाइलिंग फाउंडेशन तकनीक का उपयोग
मलेशियाई तकनीक से निर्माण
लगभग 60-70% काम पूरा
लक्ष्य: नवंबर 2027 तक पूरा करना
फंडिंग: 90% केंद्र सरकार, 10% राज्य सरकार
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