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(धीरज बंसल)
ग्वालियर। चेंबर ऑफ कॉमर्स में व्यापारियों और ग्राहकों को ठंडी चाय बांटने से व्हाईट हाउस के कोषाध्यक्ष प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा घिर गये है। बांटी गई ठंडी चाय के मुद्दे ने राजनीतिक और व्यंग्यात्मक विवाद का रूप ले लिया है। यह बात चुनावी चर्चाओं और चाय की दुकानों में तल्खी और हंसी-मजाक का बड़ा विषय बन गई है।
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आइए जानते हैं कि चाय विवाद व्यापारियों के चुनावी राजनीति में कैसे उभरा है। हालांकि ना ही चेम्बर चुनावों का ऐलान हुआ है और ना ही आचार संहिता लगी है। लेकिन व्हाईट हाउस के कोषाध्यक्ष प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा पर चेंबर सदस्यों ने चुनावी राजनीति करने का आरोप लगाया है। व्हाईट हाउस के कोषाध्यक्ष प्रत्याशी मनोज अग्रवाल बाबा पर कुछ लोगों ने चाय के पैकेट आईस टी व थैला बांटने के आरोप लगाये है। ऐसे लोगों का कहना है कि मनोज अग्रवाल बाबा चेंबर चुनावों के दौरान ऐसा नहीं कर सकते। अक्सर जब उम्मीदवार अपने समर्थकों या मतदाताओं के साथ बैठकें करते हैं, तो चाय-नाश्ते का प्रबंध किया जाता है। परंतु बाबा ने प्रोडक्ट प्रमोशन के दौरान आईस टी व थैला बांटे है। स्थानीय विपक्षी व्यापारी नेता इस मुद्दे को तुरंत लपक रहे हैं। यहां बता दें कि भारतीय चुनावों में चाय की गुमटियां अनौपचारिक चुनाव कार्यालय जैसी होती है ठंडी चाय जैसे छोटे प्रसंग भी चाय की चुस्कियों के बीच बड़े राजनीतिक किस्सों में बदल जाते हैं, जो किसी भी नेता या बाबा (उम्मीदवार) की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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हालांकि बाबा का इस मामले में कहना है कि वह बाघबकरी चाय के थोक कारोबारी है और अभी कंपनी ने आईस टी लांच की है, तो कंपनी के एजेंट व सेल्समैन व्यापारी समाज के लोगों व उनके घर के सदस्यों को कंपनी की पालिसी के तहत चाय पहली बार टेस्ट के लिये दे रहे हैं। लेकिन यही ठंडी चाय ने व्यापारी नेताओं के चुनावों में गर्माहट पैदा कर दी है।
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