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ग्वालियर| शहर में ट्रैफिक जाम के झाम से मुक्ति दिलाने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने के लिए वेस्टर्न बायपास परियोजना अब हकीकत बनने की ओर अग्रसर है। पनिहार से निरावली तक बनने वाला 28.5 किलोमीटर लंबा यह बायपास न केवल शहर के भीतर भारी वाहनों का प्रवेश रोकेगा, बल्कि ग्वालियर के पश्चिमी हिस्से को आर्थिक और औद्योगिक हब के रूप में विकसित करेगा। 1347 करोड़ रुपए की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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वेस्टर्न बायपास केवल एक सड़क नहीं, बल्कि ग्वालियर की आर्थिक प्रगति की नई लाइफलाइन है। शहर को विस्तार देने के लिए पश्चिमी क्षेत्र का विकसित होना अनिवार्य था। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि 2028 की डेडलाइन केवल कागजों तक सीमिल न रहे। निर्माण की गुणवत्ता और समय सीमा पर कड़ी निगरानी ही इस गेमचेंजर प्रोजेक्ट का असली लाभ जनता तक पहुंचा पाएगी। वर्तमान में भारी वाहनों को शहर के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे जाम और हादसों का खतरा बना रहता है। वेस्टर्न बायपास के तैयार होते ही आगरा-ग्वालियर कॉरिडोर सीधे शिवपुरी एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। पनिहार से निरावली तक की 28.5 किमी की दूरी तय करने में अब केवल 20 से 30 मिनट लगेंगे। वहीं, परियोजना के दावों के मुताबिक 88 किमी का लंबा सफर भी लगभग 35 मिनट में पूरा हो सकेगा। ग्वालियर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव 40% तक कम होने की उम्मीद है।
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पश्चिमी ग्वालियर बनेगा नया औद्योगिक केंद्र
अब तक ग्वालियर का विकास मुख्य रूप से पूर्वी क्षेत्र (सिटी सेंटर, मुरार, दीनदयाल नगर) तक सीमित रहा है। वेस्टर्न बायपास इस भौगोलिक असंतुलन को दूर करेगा।
- निवेश की संभावनाः बायपास के किनारे नई औद्योगिक इकाइयां और लॉजिस्टिक पार्क बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेगे।
- ग्रामीण उत्थानः पश्चिमी क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण इलाकों में सड़क और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होगा।
- मैग्नेट सिटीः यह प्रोजेक्ट ग्वालियर को दिल्ली-एनसीआर के विकल्प के रूप में काउंटर मैग्नेट सिटी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
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आधुनिक डिजाइन: वन्यजीवों का भी रखा ख्याल
परियोजना को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए विशेष तकनीकी प्रावधान किए गए हैं:
एंट्री-एग्जिटः वाहन चालकों की सुविधा के लिए 3 प्रमुख एंट्री और एग्जिट पॉइंट बनाए जाएंगे।
13 अंडरपासः स्थानीय लोगों और वाहनों के निकलने के लिए 13 अंडरपास प्रस्तावित हैं।
पर्यावरण संतुलनः वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से में वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष एनिमल अंडरपास की योजना तैयार की गई है।
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