
ग्वालियर। शहर में बढ़ते प्रदूषण के आंकड़ों के बाद नगर निगम प्रशासन ने कागजों में लंबा चौड़ा प्लान तैयार कर लिया है। साथ ही ग्रीन नेट नहीं लगाने वाले, सड़क पर सीएंडडी वेस्ट फेंकने वाले और कचरे में आग लगाने वालों पर जुर्माने के दावे भी किए जा रहे हैं। वहीं दिलचस्प बात ये है कि रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य में ही ग्रीन नेट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इमारतों के निर्माण के दौरान केवल आसमास पांच-सात फीट के टीनशेड लगाए गए हैं। वहीं सीएंडडी वेस्ट अब भी खुले में फेंका जा रहा है, जबकि बसंत विहार से एजी पुल मार्ग पर सड़क से उड़ती धूल अब भी आमजन के लिए परेशानी की वजह बनी हुई है।

रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ के बाद काफी मलबा प्लेटफार्म नंबर एक के सर्कुलेटिंग एरिया में पड़ा हुआ है। हालांकि आधे हिस्से में टीनशेड लगाकर कवर किया गया है। वहीं जिस रास्ते से यात्री अंदर या बाहर निकलते हैं, वहां काफी बड़ा हिस्सा खुला है। इसी प्रकार यहां ऊंची इमारतों का निर्माण हो रहा है और यहां करीब 10 फीट ऊंचे टीनशेड लगाए गए हैं। यह हादसे से तो बचा सकते हैं, लेकिन धूल-मिट्टी उड़ने से नहीं रोक सकते। थोड़ी बहुत कहीं ग्रीन नेट लटकी हुई दिखती है, लेकिन यह केवल सुरक्षा के लिए ही लगाई प्रतीत होती है। बसंत विहार से एजी पुल मार्ग पर नगर निगम के निर्माण कार्य के चलते आधी अधूरी बनी सड़क पर धूल मिट्टी उड़ रही है। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग सांस के साथ काफी धूल मिट्टी फांकने को मजबूर हैं। यदि फागर मशीन से पानी डलवाया जाए तो मिट्टी बैठ सकती है, जिससे लोगों की परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। वैसे इसी प्रकार की स्थिति सिटी सेंटर, सचिन तेंदुलकर मार्ग सहित कई इलाकों में दिखाई देती है। नगर निगम का दावा है कि प्रदूषण को रोकने के लिए भवन शाखा द्वारा निर्माण कार्य के दौरान ग्रीन नेट नहीं लगाने वाले और सीएंडडी वेस्ट खुले में फेंकने वालों पर ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कार्रवाई कर सात हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है। हालांकि इसमें अन्य विधानसभा क्षेत्र में हुई कार्रवाई की कहीं कोई जानकारी नहीं है।

