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रनिंग ट्रैक पर पड़े लावारिस चूज़े को बंगले ले गये एडीजी राजाबाबू सिंह

मप्र पुलिस के एडीजी राजाबाबू सिंह अपने प्रकृति प्रेम के ख़ातिर अपनी अलग पहचान रखते है। देशी गौ पालन हो या फिर वैज्ञानिक तरीक़े से पौधारोपण , उन्होंने मिसाल ही क़ायम की है। इस बीच उन्होंने एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की है। जिसमें उन्होंने बताया है कि जीवाजी यूनिवर्सिटी के कैम्पस में रनिंग के दौरान ट्रैक पर उन्हें एक चिड़िया का चूज़ा (बच्चा) मिला। कोई हिंसक जानवर उनका शिकार ना कर लें इसके लिये उन्होंने उसे उठाया । आसपास जब कोई घोंसला नही दिखा तो अपने बंगले ले आये। यहाँ स्टाफ़ की मदद से उन्होंने मिट्टी के सकोरे…

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मप्र पुलिस के एडीजी राजाबाबू सिंह अपने प्रकृति प्रेम के ख़ातिर अपनी अलग पहचान रखते है। देशी गौ पालन हो या फिर वैज्ञानिक तरीक़े से पौधारोपण , उन्होंने मिसाल ही क़ायम की है। इस बीच उन्होंने एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की है। जिसमें उन्होंने बताया है कि जीवाजी यूनिवर्सिटी के कैम्पस में रनिंग के दौरान ट्रैक पर उन्हें एक चिड़िया का चूज़ा (बच्चा) मिला। कोई हिंसक जानवर उनका शिकार ना कर लें इसके लिये उन्होंने उसे उठाया । आसपास जब कोई घोंसला नही दिखा तो अपने बंगले ले आये। यहाँ स्टाफ़ की मदद से उन्होंने मिट्टी के सकोरे में घास भरकर एक घोंसला तैयार किया है। इसमें उसके लिये दाना -पानी का प्रबंध किया है। श्री सिंह का कहना है कि चूज़ा किस प्रजाति का ये अभी समझ नहीं आया है क्योंकि वह अभी काफ़ी छोटा है। उसे बचाने की कोशिश की है, आगे ईश्वर की मर्ज़ी है।
दरअसल मासूम के प्रति दया कोई हैरत वाला काम नहीं है। बस संदेश हम आमजनता मानस तक पहुँचाना चाहते है कि पुलिस के आला अफ़सर की प्रकृति के प्रति संवेदना है जो मिसाल है। ऐसे में झुलसा देने वाली गर्मी में मासूमों के प्रति दया का भाव रखें और उन्हें आश्रय व दाना-पानी का प्रबंध भी करें।
मप्र पुलिस के एडीजी राजाबाबू सिंह अपने प्रकृति प्रेम के ख़ातिर अपनी अलग पहचान रखते है। देशी गौ पालन हो या फिर वैज्ञानिक तरीक़े से पौधारोपण , उन्होंने मिसाल ही क़ायम की है। इस बीच उन्होंने एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की है। जिसमें उन्होंने बताया है कि जीवाजी यूनिवर्सिटी के कैम्पस में रनिंग के दौरान ट्रैक पर उन्हें एक चिड़िया का चूज़ा (बच्चा) मिला। कोई हिंसक जानवर उनका शिकार ना कर लें इसके लिये उन्होंने उसे उठाया । आसपास जब कोई घोंसला नही दिखा तो अपने बंगले ले आये। यहाँ स्टाफ़ की मदद से उन्होंने मिट्टी के सकोरे…

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