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469 गांव प्यासे, अधिकारी मालामाल: जल जीवन मिशन की लाश पर बैठा भ्रष्टाचार

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “जल जीवन मिशन” योजना ग्वालियर-चंबल संभाग में कागजों तक सीमित होकर रह गई है। हकीकत में नल तो दूर, पाइप तक गायब मिल रहे हैं। 355 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद ग्वालियर जिले के 469 गांव आज भी प्यासे हैं। ठेकेदारों को एक्सटेंशन दे दिया गया, पेनल्टी नहीं काटी गई, और ग्रामीणों को मिला सिर्फ धोखा।
मध्य प्रदेश आरटीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष एडवोकेट संजय दीक्षित ने इस पूरे खेल को जनता के पैसे की लूट करार दिया है।योजना 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई थी। लक्ष्य था 2024 तक हर घर तक नल से जल पहुंचाना। लेकिन अब डेडलाइन 2028 तक खिसक चुकी है। ग्वालियर जिले में सरकार ने 355 करोड़ 38 लाख 17 हजार रुपये का बजट दिया, लेकिन हकीकत ये है कि काम अब भी अधूरा है। दिसंबर 2025 तक काम पूरा होना था। सबसे बड़ा खुलासा पेनल्टी में हुआ। नियमों के मुताबिक अगर ठेकेदार समय पर काम पूरा नहीं करते तो उन पर कुल लागत का 10% पेनल्टी लगनी थी। जिले में पेनल्टी का आंकड़ा लगभग 32 करोड़ बैठता है, लेकिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने वसूली के बजाय ठेकेदारों को एक्सटेंशन दे दिया।
टंकियां सूखी, पाइप तक गायब
भितरवार जनपद पंचायत के अमरोल गांव में 2 हजार की आबादी है। कहीं पानी आ रहा है, कहीं नहीं। नल कनेक्शन तो लग गए, लेकिन टोंटी तक नहीं। कई गांवों में पाइप लाइनें जमीन के ऊपर ही पड़ी सड़ रही हैं। कई गांवों में टंकियां भरने के लिए पानी ही नहीं है। कहीं टंकी निर्माण में लापरवाही से टंकी फेल हो गई, तो कहीं नल की टोंटियां लगाने से पहले ही गायब हो गईं। घाटीगांव में डांडा खिरक में टंकी भरी गई तो वह फेल हो गई। डबरा-भितरवार क्षेत्र के 131 गांवों में 2024 तक नलों से पानी सप्लाई शुरू होनी थी, लेकिन काम अधूरा है। दो बार एक्सटेंशन मिलने पर भी परियोजना पूरी नहीं हुई। महाराजपुर में गलत डिजाइन की टंकी से आधे गांव में पानी नहीं पहुंच रहा। सुलतानपुरा और देवदयापुरा में टंकियां बनकर तैयार होने के बाद भी बिजली और तकनीकी समस्याओं से योजना बंद पड़ी है।
ग्वालियर संभाग के जिलों की स्थिति:
– ग्वालियर: 1,09,327 परिवारों में से 1,03,555 को कनेक्शन – 94.72%
– दतिया: 1,05,630 में से 98,783 – 93.52%
– मुरैना: 3,27,441 में से 2,91,423 – 89.00%
– भिंड: 2,53,756 में से 2,11,233 – 86.40%
– श्योपुर: 1,61,491 में से 1,19,913 – 74.25%
– गुना: 1,74,094 में से 1,01,958 – 58.57%
– शिवपुरी: 3,21,063 में से 1,67,500 – 52.17%
– अशोकनगर: 1,35,305 में से 62,961 – 46.53%
मुरैना जिले में 2022-23 में 707 पंचायतों और मजरा-टोलों में 315 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अनुमानित लागत 574 करोड़ से ज्यादा थी। अलापुर गांव में 2023 में 2.33 करोड़ की लागत से टंकी और पाइपलाइन बनी, लेकिन घरों में कनेक्शन नहीं दिए गए। कई जगह लाइन ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
एडवोकेट संजय दीक्षित ने कहा:
“355 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी गांव प्यासे हैं, टंकियां सूखी पड़ी हैं, पाइप गायब हैं। अधिकारी खुलेआम जनता के पैसे लूट रहे हैं और ऊपर तक पहुंच होने का हवाला देकर कार्रवाई रोक रहे हैं। इसके लिए पूर्व मुख्य अभियंता आर.एल.एस. मौर्य, प्रभारी अधीक्षण यंत्री और भिंड की कार्यपालन यंत्री आर.के. सिंह पूरी तरह जिम्मेदार हैं। ये सिर्फ लापरवाही नहीं, सीधा घोटाला है।”
उन्होंने मांग की कि:
1. जल जीवन मिशन के तहत ग्वालियर-चंबल में हुए खर्च की CAG या लोकायुक्त से जांच कराई जाए।
2. समय पर काम न करने वाले ठेकेदारों से 32 करोड़ की पेनल्टी तत्काल वसूली जाए।
3. जिन गांवों में टंकी बनी लेकिन पानी नहीं पहुंचा, वहां 3 महीने में सप्लाई शुरू की जाए।
4. पूर्व मुख्य अभियंता आर.एल.एस. मौर्य, प्रभारी अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री आर.के. सिंह सहित दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो।