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फार्मा इंडस्ट्री पर युद्ध का असर, दवाएं हुई महंगी

– पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, शुगर और बीपी की दवाओं पर असर
– रॉ मटेरियल में भी बढ़ोतरी

ईरान-इजरायल युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव से फार्मा इंडस्ट्री गंभीर संकट में है। कच्चे माल (API) की सप्लाई बाधित होने और शिपिंग लागत (भाड़ा) 40% तक बढ़ने से दवाएं 20-30% तक महंगी हो गई हैं। पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और शुगर-बीपी जैसी आवश्यक दवाएं, साथ ही पैकेजिंग सामग्री के दाम तेजी से बढ़े हैं।
ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की आंच अब भारत के मेडिकल सेक्टर तक पहुंच गई है. कच्चे माल की कमी और पैकेजिंग लागत बढ़ने से पैरासिटामोल और और शुगर जैसी आम दवाओं के दाम महंगी हो गई हैं। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार, शिपिंग और पैकेजिंग लागत में वृद्धि ने दवाओं की कीमतों को प्रभावित किया है. बुखार, डायबिटीज, इन्फेक्शन और और सांस की बीमारियों की दवाओं पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. फार्मा संगठनों ने सरकार को इमरजेंसी रिपोर्ट सौंपी है, ताकि कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके| युद्ध के कारण एपीआई (Active Pharmaceutical Ingredients) और पेट्रोकेमिकल-आधारित पैकिंग सामग्री की कमी से लागत बढ़ी है। युद्ध क्षेत्र के पास से जहाजों की आवाजाही रुकने या बदलने से भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा हो गया है। कच्चे माल की कमी के कारण कई फार्मा कंपनियों ने प्रोडक्शन (3 शिफ्ट से घटाकर 1 शिफ्ट) कम कर दिया है। भारत की कई कंपनियों का फार्मा निर्यात प्रभावित हुआ है।यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो दवाओं की भारी किल्लत हो सकती है और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ सकता है।