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नवग्रहों के राजा सूर्य 14 अप्रैल को प्रातः 9:52 बजे मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास की समाप्ति मानी जाती है। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी और लोग विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत जैसे शुभ कार्य कर सकेंगे। 14 मार्च की रात 11:59 बजे सूर्य ने कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश किया था। इस दौरान एक माह तक विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रही।
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पंडित के अनुसार, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश को मेष संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना।इस बार सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जहां वे उच्च स्थिति में माने जाते हैं। मेष राशि का स्वामी मंगल है। इस अवधि में आने वाले व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व रहेगा, जिनके आधार पर विभिन्न संस्कारिक कार्य संपन्न किए जा सकेंगे। 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर देशभर में बिना मुहूर्त के विवाह होंगे। पंचांग गणना के मुताबिक इस वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सोमवार, 20 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र में पड़ रही है।
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सोमवार के दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग सर्वार्थ सिद्धि योग बनाता है, वहीं मध्य रात्रि में सोमवार के साथ मृगशिरा नक्षत्र का योग अमृत सिद्धि योग का निर्माण करता है। इस कारण अक्षय तृतीया इस बार विशेष पुण्यकाल वाली रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए विभिन्न प्रकार के पूजन का विधान धर्मशास्त्रों में बताया गया है। साथ ही अक्षय तृतीया पर पितरों के निमित्त पूजन का भी विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य देता है और शुभ फल प्रदान करता है।
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