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ग्वालियर| अगर आप बाजार से दूध, मावा या अन्य दुग्ध उत्पाद खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आपके स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। जिले में मिलावटखोर दूध में पानी तो मिला ही रहे हैं, अब फैट बढ़ाने के लिए सीधे रिफाइंड तेल का इस्तेमाल कर रहे है। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा विभाग की चलित लैब (एमएफटीएल) की जांच रिपोर्ट में हुआ है। विभाग द्वारा पिछले करीब 14 महीनों में जिलेभर से 4,491 नमूने लिए गए, जिनमें से 225 नमूने मौके पर ही फेल पाए गए। सबसे ज्यादा मिलावट दुग्ध उत्पादों और नाश्ते की दुकानों पर मिलने वाले खाद्य तेल में सामने आई है।
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चलित प्रयोगशाला की जांच में सामने आया कि दूध में पानी मिलाकर उसकी प्राकृतिक गुणवत्ता को खत्म किया जा रहा है। जब पानी मिलाने से दूध में फैट कम हो जाता है, तो उस कमी को छिपाने के लिए मिलावटखोर उसमें रिफाइंड तेल मिक्स कर रहे हैं। यही नहीं, मावा और पनीर जैसे दुग्ध उत्पादों में भी की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, नाश्ते की दुकानों पर एक ही तेल को बार-बार उबालकर इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे वह पूरी तरह अमानक (जहरीला) हो चुका था। खाद्य सुरक्षा विभाग की मोबाइल वैन (चलित लैब) ने इस अवधि में मुख्य रूप से छोटे दुकानदारों, हलवाइयों और दूध डेरियों पर औचक दबिश दी। चलित लैब में जिन 225 सामग्रियों के परिणाम तुरंत फेल आए, विभाग ने उनके वैधानिक सैंपल कलेक्ट किए हैं। अब इन सैंपलों को विस्तृत और पुख्ता जांच के लिए राज्य स्तरीय मुख्य प्रयोगशाला में भेजा गया है, ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। दूध में पानी है तो उपभोक्ता उसकी पहचान घर पर भी कर सकते हैं। अगर दूध फर्श पर फैला देंं और वह तेज गति से बहे तो समझें कि उसमें पानी है। यदि बहने की गति तेज नहीं है तो उस दूध में पानी नहीं है।
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