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ग्वालियर। मध्यप्रदेश में व्यवसायिक वाहनों की फिटनेस जांच अब भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुकी है। वेदांती व्हीकल फिटनेस सेंटर पर फिटनेस प्रमाण पत्र के नाम पर मनमानी रकम वसूलने का आरोप सामने आया है। आरोप है कि जहां नियमों के तहत 1080 रुपये में फिटनेस होनी चाहिए, वहीं सेंटर पर 4000 से 4500 रुपये तक की वसूली की जा रही है।
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प्रदेशभर में यह कंपनी ग्वालियर, भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में काम कर रही है। स्कूल बसों में पैनिक बटन की फिटिंग के लिए 1080 रुपये शुल्क तय है, लेकिन उनसे 4500 रुपये तक मांगा जाता है। पुरानी बसों के लिए 2000 रुपये और जोड़ लिए जाते हैं। रसीद सिर्फ तय रकम की मिलती है, बाकी सब ‘ब्लैक’ में लिया जाता है। पहले तक यह काम सीधे परिवहन विभाग करता था। लेकिन शिकायतों के चलते इसे निजी कंपनियों को सौंप दिया गया। अब यह जिम्मेदारी वेदांती कंपनी के पास है, जिसने ग्वालियर सहित कई जिलों में फिटनेस सेंटर खोले हैं। ग्वालियर निवासी आकाश आर्य ने शिकायत की कि उनके ऑटो वाहन की फिटनेस के लिए ₹1500 रिश्वत मांगी गई। इनकार करने पर उनका वाहन ‘फिटनेस फेल’ कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर की जनसुनवाई में यह मामला उठाया।
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एजेंट ने खुलासा किया कि कंपनी ने जमीन 1.20 लाख मासिक किराए पर ली है और सारा खर्चा वाहन मालिकों से वसूला जाता है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट भी आंखें मूंदे बैठा है, एजेंट ने कहा। इस संबंध में आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने कहा कि पहले भी ऐसी शिकायतें आई हैं और अब फिर से जांच टीम भेजी जाएगी। वहीं, वेदांती फिटनेस सेंटर के प्रबंधक मान सिंह राजपूत ने सफाई दी कि ‘हम तय रेट पर ही फिटनेस करते हैं और पूरी रसीद देते हैं।’
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