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भोपाल| मध्यप्रदेश में काफी लंबे अंतराल के बाद निगमों बोर्डों और प्राधिकरणों में अध्यक्षों के साथ ही उपाध्यक्षों की नियुक्तियों हो चुकी है। पदों के चाहवान नेताओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और अब उन पर बेहतर काम करने की दवाब भी है। इसी सिलसिले में अब सरकार की ओर से अहम गाइडलाइन जारी हो चुकी है। नई गाइडलाइन के मुताबिक अब उन्हें हर 6 महीने में परफॉर्मेंस रिपोर्ट देनी होगी और उनके खिलाफ शिकायत नहीं आनी चाहिए। ऐसा नहीं करने पर उन पर गाज गिर सकती है और तीन बार समझाइश पर भी नहीं माने तो सीधे बाहर का रास्ता दिखाएगा जाएगा। जी हां ये सख्त गाइडलाइन सीएम की मंशा के आधार पर तय की गई है।
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हाल में राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को हर 6 महीने में परफार्मेंस रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट में जनता के लिए क्या किया और आगे क्या करेंगे जैसे कामों की डिटेल होगी। दरअसल नियुक्ति के बाद से संबंधित निगम मंडल, प्राधिकरण या बोर्ड में क्या सुधार हुआ ये सब बताना होगा। जानकारी आ रही है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सत्ता व संगठन में ठोस सुधारों के साथ ही जनता तक पकड़ बनाने के लिए ऐसी गाइडलाइन बनाई है जो जवाबदेही तय करेगी। इन गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर 3 बार समझाइश दी जाएगी और फिर भी सुधार नहीं हुआ तो बाहर कर दिया जाएगा| सत्ता-संगठन ने जो नई गाइडलाइन तय की है उसमें फिजूलखर्च को लेकर खासा फोकस है। नियमों से विपरीत जाकर ज्यादा खर्च करने और अनावश्यक खर्च करने वालों पर नजर रखी जाएगी। ऐसे अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को तीन बार समझाइश दी जाएगी और वो नहीं माने तो सीधे पद से बाहर किया जाएगा।
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इसके साथ ही आम जनता को अनदेखा करना भी आसान नहीं होगा। क्योंकि निगम, प्राधिकरण, आयोग का संबंध सीधे जनता से है, तो इस लिहाज से जनता की दिक्कतों को दूर करने के लिए भी सजग रहना होगा। परेशानियों को लेकर सुनवाई भी करनी होगी। इस तरह से जनता को सर्वोपरी मानकर काम करना होगा और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगानी होगी इसके साथ ही अध्यक्ष, उपाध्यक्षों को सत्ता और संगठन से तालमेल बनाकर चलना होगा। गलती करने पर बोला जाएगा और नहीं मानने पर पूछताछ होगी, अगर संतुष्ट जवाब नहीं मिलता को फिर एक्शन भी होगा। किसी भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्यों के विवादित बयानों से बचना होगा। सत्ता व संगठन ने तय किया है कि किरकिरी कराने वाली बयानबाजी को सहन नहीं किय जाएगा। तो जाहिर से बात है कि पद तो मिल गए हैं अब गाइडलाइन और जनता को ध्यान नें रखकर चलना होगा ताकि धरातल पर काम हो सकें और जनता के प्रति सरकार जवाबदेह बन सके।
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