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ग्वालियर। शहर में ड्रग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ड्रग लाइसेंस बनवाने के नाम पर ड्रग इंस्पेक्टर से सांठगांठ और रिश्वतखोरी के दावों का मामला उजागर होने के बाद भी खाद्य एवं औषधि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी का नाम सामने आने के बावजूद जांच और जवाबदेही को लेकर चुप्पी बनी हुई है।
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मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस बनवाने के लिए सक्रिय दलाल खुलेआम अधिकारियों से सेटिंग होने का दावा कर रहे हैं। जांच के दौरान मनोज मंगवानी नामक व्यक्ति ने ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी से सीधी सांठगांठ होने की बात कही थी। उसने दावा किया था कि लाइसेंस बनवाने का कुल खर्च 61 हजार रुपये आएगा, जिसमें 27 हजार रुपये कथित तौर पर ड्रग इंस्पेक्टर के लिए, 28 हजार रुपये फार्मासिस्ट की व्यवस्था के लिए और छह हजार रुपये आवेदन शुल्क के रूप में लिए जाएंगे। यह पूरा मामला संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है। लाइसेंस बनवाने के नाम पर अवैध वसूली और अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किए जाने के आरोपों के बावजूद अब तक न तो किसी दलाल पर कार्रवाई हुई है और न ही मामले की औपचारिक जांच शुरू की गई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विवाद सामने आने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर उमेश रामचंदानी इन दिनों ग्वालियर कार्यालय में नियमित रूप से नहीं बैठ रहे हैं। अब सवाल यह है कि इतने गंभीर खुलासे के बाद भी जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं और लाइसेंस प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कब होगी।
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