कंक्रीट के फुटपाथ घोंट रहे हरे-भरे पेड़ों का दम, लापरवाही से पुराने-घने पेड़ दुर्घटना का कारण बन रहे हैं

ग्वालियर। शहर के विस्तार और विकास के चक्कर में सिस्टम की लापरवाही से अब पुराने-घने पेड़ दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। मौसम बिगड़ने पर बारिश और तेज हवा से भारी -भरकम पेड़ अचानक गिर पड़ते हैं और आसपास में भारी नुकसान का कारण भी बनते हैं। बीते दिनों हुई बारिश में भी शहर के 110 पेड़ इसी कारण से धराशायी हो चुके हैं। साथ ही तमाम पेड़ अभी गिरने के इंतजार में हैं।
इनमें अधिकतर पेड़ वो ही थे, जो कई वर्ष पुराने और भारी भरकम थे। लेकिन जड़ों के पास पर्याप्त मिट्टी युक्त स्थान न होने और पोषण व रखरखाव की कमी कारण उनकी जड़ें कमजोर हुईं जिससे लगातार बारिश होने पर वो गिर गए। दरअसल, सड़क किनारे बने पेड़ों की जड़ों को पक्के सीमेंट, कंक्रीट से ढंक देना, सुंदरीकरण के चलते पेड़ों की जड़ों पर टाइल्स लगा देना पेड़ों का दम घोंट देता है। चाहे पोषण की कमी हो या समय पर रखरखाव न होना, पेड़ खराब मौसम की मार नहीं झेल पाते हैं। अब जिन अधिकारियों सहायक आयुक्त पार्क विभाग मुकेश बंसल को इसकी चिंता करना चाहिए वो अजीब तर्क देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। शहर में विकास कार्यो के चलते अगर पेड़ के पास कोई भी पक्का निर्माण करना है तो पेड़ के व्यास के हिसाब से उसके आसपास कच्चा हिस्सा छोड़ना चाहिए। इसका सटीक आंकलन करने के लिए दोपहर 12 बजे के समय पर पेड़ के नीचे आने वाली छांव के हिस्से को आधार बनाकर उतना क्षेत्र कच्चा छोड़ देना चाहिए। शहर में कई ऐसे पेड़ हैं जिनकी कटाई छंटाई लंबे समय से नहीं हुई है। बरसात में गिरने वाले अधिकतर पेड़ 40 से 60 साल पुराने होते हैं। इनकी छंटाई इस प्रकार होना चाहिए कि हवा आरपारहो सके।