एमडी नहीं तानाशाह कहिये, समग्र आईडी के तानाशाही आदेश से मीटर रीडर और उपभोक्ता परेशान

(धीरज बंसल)
ग्वालियर। मध्यप्रदेश की संवेदनशीन मोहन सरकार की मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल किरकिरी करा रहे है। उन्होंने तानाशाह जैसा एक आदेश जारी कर मीटरों रीडरों से लेकर उपभोक्ताओं तक को परेशान कर दिया है। एमडी का आदेश ऐसे समय आया है जब सरकार उघोग उन्नति और आमजन में अपनी बेहतर छवि बना रही थी। ऐसे में एमडी के एक आदेश ने सरकार की किरकिरी करा डाली है। विघुत उपभोक्ताओं और मीटर रीडरों ने मुख्यमंत्री और उर्जा मंत्री से इस आदेश का वापिस लेने की अपील भी की है। इससे उपभोक्ता के साथ मीटर रीडर बेहद परेशान है।
उल्लेखनीय है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल ने एमपी एमकेवीवीसी के सभी मीटरों रीडरों को बिल देते समय उपभोक्ता से समग्र आईडी लेने और केवायसी करने के निर्देश दिये हैं। एमडी के इस आदेश को उपभोक्ता से लेकर मीटर रीडर तानाशाही के रूप में देख रहे है। उपभोक्ताओं का कहना है कि एमडी किस बात की केवायसी करवा रहे है। विद्युत कंपनी के एमडी अपने इस आदेश के बाद तानाशाह बनकर उभर आये है। मीटर रीडर जब किसी उपभोक्ता से समग्र आईडी की मांग करते हैं और उसका ओटीपी मांगता है तो उपभोक्ता साफ ओटीपी देने से मना कर देते हैं। इससे मीटर रीडरों को तो परेशानी हो ही रही है वहीं उपभोक्ता भी परेशान है। एमडी को सरकार की छवि बनाकर चलने की जरूरत है, लेकिन वह तो सरकार की छवि धूमिल करने में लगे है। एमडी साहब को बिजली के सुधार से तो कोई मतलब है नहीं और ना ही उपभोक्ताओं की समस्याओं को निपटाने से। वह तो अपने एसी चेंबर में बैठकर तानाशाह की भूमिका अदा कर रहे है। उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं है कि आम उपभोक्ता समग्र आईडी बनवा ही नहीं रहा है। क्योंकि ना तो आम उपभोक्ता के पास राशन कार्ड है और राशन कार्ड नहीं होने से समग्र आईडी भी नहीं है। बिजली कंपनी के एमडी के तानाशाही वाला आदेश कहीं सरकार के पसीने नहीं निकलवा दें।
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