
ग्वालियर। एक हजार बिस्तर अस्पताल में भर्ती मरीज के स्वजन धर्मशाला के ताले नहीं खुलने से वर्षा में ओपीडी पर्चा काउंटर के पास ठहरने को मजबूर हैं। मरीज का बिना इलाज कराए वापस नहीं जा सकते। ऐसे में जहां वर्षा से बचने की जगह मिलती है वहीं वह बिस्तर बिछाकर लेट जाते हैं। उनका कहना है कि अगर धर्मशाला होती तो इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता।
दरअसल धर्मशाला का इंतजार दो साल से अटेंडेंट कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन धर्मशाला के ताले नहीं खोल पाया। प्रबंधन का दावा है कि धर्मशाला को शुरू करने के लिए एक करोड़ से ज्यादा का बजट मांगा गया है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाने के कारण फर्नीचर व अन्य सामान की खरीदी नहीं हो सकी। जिससे स्वजन धर्मशाला के लाभ से वंचित हैं| धर्मशाला शुरू करने का मामला जीआरएमसी की ईसी बैठक में भी उठ चुका है, लेकिन अब तक हुआ कुछ नहीं। इस मामले में जीआरएमसी व अस्पताल प्रबंधन का लापरवाह रवैया धर्मशाला निर्माण कार्य के दौरान से ही रहा है, क्योंकि डीपीआर में धर्मशाला में फर्नीचर लगाना शामिल नहीं कराया जा सका था। इसलिए आज फर्नीचर के अभाव में धर्मशाला बंद है। डीपीआर में यह काम शामिल न होने पर अस्पताल प्रबंधन को यह कराना था। लेकिन जिम्मेदार बजट का रोना रोकर फर्नीचर नहीं लगवा पाए। फर्नीचर के लिए बजट के लिए प्रस्ताव भी तैयार हुए, लेकिन मरीजों के स्वजन को दो साल से सिवाए इंतजार के कुछ हासिल नहीं हुआ।
अस्पताल प्रबंधन की अनदेखी के चलते अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजन वर्षा में परेशानी झेल रहे हैं। एक हजार बिस्तर अस्पताल के वार्डों में मरीज के साथ एक अटेंडेंट को रूकने की अनुमति होने के कारण अन्य स्वजन अस्पताल परिसर में इधर-उधर रूककर समय बीता रहे हैं। धर्मशाला के इंतजार में स्वजन सर्दी, गर्मी का सितम झेल चुके हैं| अब वर्षा से परेशानी झेलने को मजबूर हैं। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन फर्चीनर अब तक नहीं लगवा पाया।
हजार बिस्तर अस्पताल की धर्मशाला पर ताला, बारिश में पर्चा काउंटर के पास ठहरने को मजबूरी अटेंडेंट

