
ग्वालियर। शरीर को फिट रखने और शहर के लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की मंशा के साथ तैयार किया गया स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन का पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम फेल हो चुका है। इस प्रोजेक्ट का संचालन करने वाली याना कंपनी से जहां काम हटा दिया गया है, तो वहीं प्रोजेक्ट तैयार कराने वाले स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अफसर भी इन साइकिलों के संचालन में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि शहर के 50 स्टेशनों पर 500 से अधिक साइकिलें खड़े-खड़े धूल फांक रही हैं। न तो लोग इन साइकिलों के संचालन में रुचि ले रहे हैं न ही कार्पोरेशन के अफसर इन्हें प्रमोट करने के कोई प्रयास कर रहे हैं। इसके चलते जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के साढ़े पांच करोड़ रुपये बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
कार्पोरेशन के अफसरों की सोच थी कि लोग एक से दूसरी जगह जाने के लिए ज्यादा से ज्यादा साइकिलों का उपयोग करें। इसके लिए याना कंपनी को ठेका दिया गया। कार्पोरेशन ने कंपनी को साइकिल खरीदने के लिए दो करोड़ 40 लाख रुपए का अनुदान और हर महीने मेंटेनेंस के लिए 12 लाख 90 हजार रुपए के साथ मुफ्त में जगह दी। कंपनी ने सिटी सेंटर में बीएसएनएल आफिस के पास डाकिंग स्टेशन बनाया। इसके अलावा शहर में 50 अन्य स्टेशन तैयार कर वहां साइकिलें खड़ी कर दी गईं। शुरुआत में लोगों ने इन साइकिलों का उपयोग किया, लेकिन धीरे-धीरे इनके प्रति रुझान कम होता चला गया। रही-सही कसर कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गए लाकडाउन ने पूरी कर दी। तब से लेकर अब तक चार साल से ये प्रोजेक्ट ठप पड़ा हुआ है। इसके संचालन के लिए कार्पोरेशन के अधिकारी रुचि भी नहीं ले रहे हैं। याना कंपनी ने बिना अनुमति साइकिल स्टेशनों पर विज्ञापन करना शुरू कर दिया था। इसको देखते हुए नगर निगम आयुक्त किशोर कान्याल ने कंपनी पर 1.61 करोड़ रुपये से अधिक राशि का जुर्माना भी लगाया था। इसके अलावा अब शहर में ये साइकिलें चलती हुई नजर ही नहीं आती हैं। पहले साइकिलों को डाकिंग स्टेशन पर खड़ा भी किया जाता था, लेकिन फिर चोरी की संभावना को देखते हुए इन्हें ताले में बंद कर दिया गया है। अब ये साइकिलें लोगों को दिखती भी नहीं हैं और न ही इनके संचालन के लिए कोई प्रचार किया जा रहा है। वर्ष 2012 में नगर निगम द्वारा शहर में कुछ स्थानों पर साइकिल ट्रैक बनाया गया था। इनमें गांधी रोड, जीवाजी विश्वविद्यालय रोड, फूलबाग आदि इलाकों में 10 किमी लंबा साइकिल ट्रैक बनाया गया था। इसके बाद 2017 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत साइकिल ट्रैक तैयार किए गए, लेकिन अब ये साइकिल ट्रैक गायब हो चुके हैं। इन ट्रैक पर रास्ते में पेड़ से लेकर बिजली के खंबे तक खड़े नजर आते हैं। सचिन तेंदुलकर मार्ग पर तो ट्रैक को खत्म कर फुटपाथ ही तैयार कर दिया गया। वहीं बाकी स्थानों पर भी ये ट्रैक अब पैदल राहगीरों के काम आ रहे हैं।
स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन का पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम फेल, स्टेशनों पर धूल फांक रही साइकिलें

