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ग्वालियर| लोकसभा चुनाव में ग्वालियर-अंचल में कांग्रेस ने भले ही चारों सीटों एक बार फिर गंवा दी हैं, किंतु इस चुनाव के बाद अंचल में कांग्रेस का नया युवा नेतृत्व उभरकर सामने आया है। कांग्रेस के वयोवृद्ध नेतृत्व का अवसान हो गया है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. गोविंद सिंह व पूर्व मंत्री केपी सिंह, बालेंदु शुक्ला, भगवान सिंह यादव सरीखे नेता कांग्रेस की राजनीति का गुजरा कल हो गए हैं। अशोक सिंह अवश्य लोकसभा चुनाव का मोह छोड़कर राज्यसभा से निर्वाचित होने के बाद संगठन में अपनी सक्रियता को बरकरार रखने में सफल हुए हैं। दूसरी तरफ भाजपा में 50 पार के नेता दम भरेंगे और अप्रत्यक्ष रूप से इनकी डोर पर्दे के पीछे खड़े भाजपा नेताओं के हाथ में होगी।
नेतृत्व परिवर्तन के बाद प्रदेश की कमान युवाओं के हाथ में आ गई थी, किंतु युवा नेतृत्व लोकसभा चुनाव प्रदेश में खाता खोलने में नाकाम रहा। प्रदेश में शर्मनाक हार के बाद भी वृद्ध क्षत्रपों से कांग्रेस मुक्त नजर आ रही है। बात ग्वालियर-चंबल अंचल के राजनीतिक परिदृश्य करें, तो आमूल-चूल परिवर्तन दोनों दलों में नजर आ रहा है। अंचल की चारों सीटें कांग्रेस हार गई है। गुना-शिवपुरी छोड़कर कांग्रेस ने मुरैना व ग्वालियर से युवा प्रत्याशियों को मौका दिया। अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भिंड लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने अनुसूचित वर्ग के युवा नेता देवाशीष जरारिया को किनारे कर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नजदीकी बसपा मूल के नेता फूल सिंह बरैया को मौका दिया था। किंतु वे भी भाजपा का मुकाबला नहीं कर पाए। ग्वालियर व मुरैना संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में युवा प्रवीण पाठक को मैदान में उतारा। प्रवीण पाठक लोकसभा चुनाव के लिए नया चेहरा था। संगठन से पूरा सहयोग नहीं मिलने के बावजूद पिछले चुनाव के मुकाबले हार के अंतर को कम करने में सफल रहे हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव एक लाख 47 हजार मतों से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पाठक हार के अंतर को 67 हजार कम करने में सफल रहे हैं। दूसरी तरफ मुरैना संसदीय क्षेत्र से भाजपा से कांग्रेस में आए कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार के छोटे भाई सत्यपाल सिकरवार ‘नीटू’ को चुनाव मैदान में उतारा। मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव एक लाख 13 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। सिकरवार हार के अंतर को 52 हजार पर ले आए हैं। हालांकि मुरैना सीट पर कांग्रेस ने पूरा जोर लगाया था। प्रियंका गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित किया था। अंचल में हार के बाद भी प्रवीण पाठक व सिकरवार परिवार के रूप में कांग्रेस में नया नेतृत्व उभरकर सामने आया है। पाठक अब एक विधानसभा से निकलकर पूरे लोकसभा क्षेत्र में अपनी नई टेरेटरी बनाने का प्रयास करेंगे और सिकरवार परिवार पहले से कांग्रेस में मजबूत बनकर उभरा है। अब संगठन को अंचल में मजबूत करने का दायित्व युवा हाथों में हैं।

