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मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दो हालिया बयानों ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। उनके इन बयानों पर विपक्ष (कांग्रेस) ने कड़ा ऐतराज जताया है और सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस छिड़ गई है।
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भोपाल में एक स्मृति सभा के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर एक बड़ा बयान दिया| उन्होंने कहा कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, अधिकारियों के बीच खुद को संघ (RSS) से जुड़ा दिखाने की होड़ (रेस) मच गई है। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा, “अब संघ में बहुत भीड़ हो गई है। सरकार बनने के बाद जो भी अधिकारी मिलता है, वह कहता है कि मैंने भी संघ की चड्डी (हाफ पैंट) पहनी है।” विजयवर्गीय ने कहा कि दिखावा करने वालों की संख्या बढ़ने से संगठन में अच्छे और समर्पित लोगों का अकाल पड़ता जा रहा है।
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उन्होंने विपक्ष और आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग उन्हें या उनकी सरकार को ‘काफिर’ कहते हैं, उन्हें सरकार की बनाई सड़कों पर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे लोगों को ‘लाडली बहना’ जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए।विजयवर्गीय का कहना था कि भाजपा सरकार बिना किसी भेदभाव के काम करती है, लेकिन फिर भी कुछ मुस्लिम भाई उन्हें काफिर बोलते हैं।कैलाश विजयवर्गीय के इन बयानों के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिसने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।
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मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक चिंता का विषय बताया है। उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल से इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। कांग्रेस का तर्क है कि प्रशासनिक तंत्र को संविधान के प्रति वफादार होना चाहिए, न कि किसी विचारधारा के प्रति।
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