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21 जून (रविवार) को आयोजित होने वाली नीट-यूजी (NEET UG) पुर्नपरीक्षा को लेकर देश भर के छात्रों में भारी गुस्सा, मानसिक तनाव और निराशा का माहौल है। पहले आयोजित हुई परीक्षा में पेपर लीक की बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद 22.79 लाख से अधिक छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे वे देश के एजुकेशन सिस्टम को ‘पूरी तरह बेकार और फेल’ बता रहे हैं।
नीट पुनर्परीक्षा से जुड़ी विस्तृत और मुख्य खबरें इस प्रकार हैं:
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1. परीक्षा को लेकर NTA की ‘महा-तैयारी’
पिछली गलतियों से बचने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस बार परीक्षा को किसी “जंग” की तरह आयोजित कर रही है:
- सुरक्षा के तीन कड़े स्तर: परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा पहली बार अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) और स्थानीय पुलिस के हवाले की गई है।
- हाई-टेक निगरानी: देश भर के केंद्रों पर 1.5 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 15,000 जैमर्स लगाए गए हैं ताकि टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया पर पेपर लीक रोका जा सके।
- राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल: परीक्षा से ठीक एक दिन पहले शनिवार (20 जून) को सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक NTA ने 25 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों के साथ पूरे देश में रिहर्सल और मॉक ड्रिल की है|
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2. छात्रों को राहत या नया सिरदर्द?
NTA ने छात्रों के तनाव को कम करने के लिए कुछ बदलावों की घोषणा की है, लेकिन छात्र अभी भी डरे हुए हैं:
- 15 मिनट का अतिरिक्त समय: अब छात्रों को पेपर हल करने के लिए 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) मिलेंगे। यह परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी।
- रफ वर्क के लिए ज्यादा जगह: प्रश्नपुस्तिका में रफ वर्क के पन्नों की संख्या 2 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है।
- सिस्टम की नई लापरवाही: इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच भी एडमिट कार्ड में तकनीकी खराबी के कारण नागपुर के एक छात्र का परीक्षा केंद्र अबू धाबी (UAE) दिखा दिया गया। हालांकि, शिकायत के बाद NTA ने इसे सुधारने का आश्वासन दिया है।
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3. छात्रों का गुस्सा और डिप्रेशन (एजुकेशन सिस्टम पर सवाल)
सालों तक दिन-रात पढ़ाई करने के बाद भी पेपर लीक होने से छात्रों का मनोबल टूट चुका है:
- कोचिंग हब में मानसिक संकट: कोटा और सीकर जैसे बड़े कोचिंग शहरों से लगातार आ रही छात्रों की आत्महत्या की ख़बरों ने मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- भरोसे की कमी: छात्रों का कहना है कि वे 14-14 घंटे पढ़ाई तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की कोई गारंटी नहीं लगती कि इस बार भी पेपर पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ रहेगा।
- विपक्ष का हमला: पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ को लेकर विपक्षी नेता लगातार सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
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