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ग्वालियर| रियासतकालीन रायपुर बांध (Raipur Dam) और उसके जलग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्र पर हो रहे अवैध कब्जों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण आज यह ऐतिहासिक जलस्रोत गंभीर खतरे में है। इस विषय पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने भी कड़ी नाराजगी जताई है और जिम्मेदार अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। इस पूरे संकट पर जलसंसाधन और स्थानीय प्रशासन आंख मूंद कर बैठा है।
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भू-माफियाओं और स्थानीय रसूखदारों ने रायपुर बांध (रायपुर ताल) के डूब क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में अवैध कॉलोनियां खड़ी कर दी हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की कथित साठगांठ के चलते बांध की सूखी जमीन पर किसान लगातार अवैध खेती (खेतीबाड़ी) कर रहे हैं। पेहसारी बांध से रायपुर बांध तक पानी लाने वाली रियासतकालीन पक्की नहर पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जिससे 90% पानी रास्ते में ही सीपेज (बह) जाता है। इसके अलावा, उपद्रवियों ने बांध के गेट तक क्षतिग्रस्त कर दिए हैं, जिससे बारिश का पानी जमा होने के बजाय बह जाता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2019 में ही रायपुर बांध समेत शहर के 7 प्रमुख बांधों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने पिछले कई वर्षों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
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इस निष्क्रियता पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव, ग्वालियर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को कारण बताओ (अवमानना) नोटिस जारी किया है।ग्वालियर पर मंडराता जल संकट रायपुर बांध, वीरपुर और गिरवाई जैसे बांध ग्वालियर के लिए वाटर रीचार्ज का मुख्य जरिया थे। इनके खत्म होने से ग्वालियर का भूजल स्तर 150 से 200 फीट नीचे जा चुका है, जिससे शहर बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने की कगार पर है।
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