ग्वालियर। ग्वालियर में स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर निगम की तैयारियां सिर्फ बैठकों तक सीमित दिख रही है। जबकि धरातल पर सबकुछ शून्य नजर आ रहा है। जहां निगम के बाथरूमों की हालत दयनीय है। वहीं दीवारें बेहद ही गंदी है। जबकि हर बार दीवारों की रंगाई, पुताई और पेंटिंग का काम किया जाता था। इस बार लगता है रंगाई, पुताई और पेंटिंग के टेंडर नहीं कराये है।
नगर निगम के अनुसार, वर्तमान में शहर में स्वच्छता दल के आने की संभावना को देखते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम ग्वालियर ने हाल ही में विभिन्न वार्डों (जैसे वार्ड 13, जोन 04) में दीवारों की रंगाई-पुताई, प्लास्टर और पेंटिंग के लिए टेंडर जारी किए हैं, जिनकी समय सीमा 22 मई 2026 तक है। निगमायुक्त संघ प्रिय ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि चेक लिस्ट के अनुसार वॉल पेंटिंग, डिवाइडर मेंटेनेंस और रोड मार्किंग जैसे कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं। कुछ क्षेत्रों में युवाओं और छात्राओं ने स्वयं आगे बढ़कर बदरंग दीवारों पर पेंटिंग कर स्वच्छता का संदेश दिया है। सर्वेक्षण टीम के भ्रमण के दौरान कई सार्वजनिक शौचालय गंदे और बदबूदार पाए गए हैं, जिसे टीम ने अपनी रिपोर्ट में नोट भी किया है। निगमायुक्त ने हाल ही में सुभाष शिंदे की छावनी स्थित शौचालय का निरीक्षण कर वहां तत्काल पेंटिंग और सिविल कार्य कराने के निर्देश दिए हैं। निगमायुक्त की प्रत्येक वार्ड के लिए 66 मॉनिटर नियुक्त किए गए हैं, जिनकी जिम्मेदारी सार्वजनिक शौचालयों की सफाई और वार्डों के सौंदर्यीकरण की दैनिक रिपोर्ट देना है।
निगमायुक्त संघ प्रिय तो लगातार स्वच्छता के लिये बैठक से लेकर मैदान तक में डटे हुये है। लेकिन नीचे का अमला अपनी ढपली अपना राग अलाप रहा है। जिसके कारण दीवारे गंदी और बाथरूमों की हालत दयनीय है। नीचे अमला निगमायुक्त को लगातार रिपोर्ट नहीं कर रहे है और ना ही फील्ड में कुछ रहे है। जिसके कारण लगातार शहर की हालत स्वच्छता के मामले में बिगड़ती जा रही है। जगह जगह कचरे ढेर निगम के कामों की पोल खोल रहे है।
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