ग्वालियर। ग्वालियर में सोशल मीडिया पर अवैध कालोनियों का मायाजाल फैल चुका है। कम कीमत और अधिक सुविधाओं का लालच देकर शासन के नियमों पर खरी न उतरने वाली इन अवैध कालोनियों के जाल में लोग फंस रहे हैं। खेत और मैदान सस्ते दामों में एग्रीमेंट से लिया और प्लाटिंग शुरू कर दी। सड़क, सीवर और बिजली पानी की क्या व्यवस्था होगी, कुछ पता नहीं होता और अवैध कालोनी को नाम देकर सोशल मीडिया फेसबुक-इंस्टाग्राम आदि पर ब्रांडिंग शुरू कर दी जाती है। सबसे खास बात कि फार्म-फोर अप्रूव्ड कालोनी लिखा जाता है जबकि कहीं कोई स्वीकृति हकीकत में नहीं होती है।
ग्वालियर में अवैध कालोनियों का जाल शहरी क्षेत्र में जितनी तेजी से बढ़ता जा रहा है उतनी की नगर निगम की मानीटरिंग सुस्त है। नगर निगम को ऊंगलियों पर गिनने लायक अवैध कालोनी मिली और कार्रवाई दिखा दी गई, हकीकत में अवैध कालोनी बसाने वाला माफिया दिनोंदिन काम में लगा और कार्रवाई ही नहीं हो रही है। बता दें कि ग्वालियर में अवैध कालोनियों का बड़ा नेटवर्क है। अवैध कालोनियों को लेकर शहर में कार्रवाई का अधिकारी नगर निगम के पास है और ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व विभाग कार्रवाई करता है। शहरी क्षेत्र में अवैध कालोनियों को लेकर कार्रवाई अब बंद जैसी हो गई है। अवैध कालोनियों पर शहरी क्षेत्र में कार्रवाई न होने का सबसे बड़ा फायदा अवैध कालोनी बसाने वालो ने उठाया, जिसके बाद से मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक जमकर अवैध कालोनियों की ब्रांडिंग की जा रही है और सिस्टम चुप्पी साधे हुए बैठा है।
अवैध कालोनियों को बसाने वाले सबसे पहले सस्ते प्लाट का झांसा देते हैं और सबसे कम कीमत में उपलब्ध कराने का दावा करते हुए ग्राहकों को फंसाया जाता है। मौके पर कोई सुविधा नहीं होती है और न ही रेरा से लेकर अन्य एजेंसियों की स्वीकृति होती है। नौजवान युवक युवतियों को सोशल मीडिया पर ब्रांडिंग के लिए रख लिया जाता है जिन्हें खुद भी नहीं पता होता कि वे अवैध कालोनी में लोगों को प्लाट खरीदने के लिए लुभावना आफर दे रहे हैं। जो लोग एडवांस दे देते हैं फिर वे लंबे समय के लिए फंस जाते हैं और बिल्डर चक्कर लगवाता रहता है।
सोशल मीडिया पर अवैध कॉलोनियों का ‘मायाजाल’, सस्ते प्लॉट के नाम पर ठगी का खेल

