श्रीजी का मंडपों में आगमन शुरू; घर-घर विराजेंगे गणपति बप्पा, इस मुहूर्त में करें स्‍थापना

(धीरज बंसल)

भास्कर प्लस डाट काम

ग्वालियर। श्रीगणेशोत्सव का उल्लास शुक्रवार से ही शुरू हो गया है। श्रीजी के स्वागत के लिए मंडप तैयार हो गए हैं। शुक्रवार को आधी रात से ढोल-तासे व बैंड बाजों के साथ श्रीजी का मंडपों में आगमन शुरू हो गया। नया बाजार, दौलतगंज व अचलेश्वर मंदिर से सनातन धर्म मंदिर तक आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है। विधि-विधान के साथ शनिवार की सुबह से ही गौरी पुत्र को विराजित करने का सिलसिला शुरू हो गया। गणेश मंडपों में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। अचलेश्वर मंदिर पर आधी रात को 20 फीट ऊंची प्रतिमा गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ अपने मंडप पहुंची। भास्कर प्लस डाट काम
बाजारों में गणेशोत्सव का उत्साह नजर आ रहा है। बच्चे गणपति बप्पा को घर लाने के लिए आकर्षक प्रतिमाओं को पसंद कर रहे हैं। थीम रोड(कटोराताल), गोपाचल पर्वत की तलहटी, जीवाजी गंज, नई सड़क, लक्ष्मीगंज, थाटीपुर, हजीरा, गोविंदपुरी चौराहे पर स्थित गणेशोत्सव भीड़ नजर आ रही है। गणेश मंडप सजाने के लिए फूल, केले के पत्ते, आम के पत्ते, अशोक के पत्ते, कमल के फूल भी मिल रहे हैं। ढोल-तासे वाले नजर आ रहे हैं। नगर में खासगी बाजार स्थित मोटे गणेशजी, एमएलबी रोड पर स्थित अर्जी वाले श्रीजी, हरिशंकरपुरम में प्राचीन गणेश मंदिर में आकर्षक विद्युत सजावट की गई है। मंदिर में श्रीजी के दर्शनों का सिलसिला शनिवार की सुबह से शुरू हो जाएगा। नगर की प्रमुख मिष्ठान के प्रतिष्ठानों पर गणेशोत्सव के लिए विशेष प्रकार के मोदक,बुंदी व बेसन के लड्डू भी उपलब्ध हैं। ऐसी मान्यता है कि गणेशजी को मोदक विशेष रूप से पसंद हैं।
भाद्रपद की शुक्लपक्ष की चतुर्थी शनिवार से गणेश उत्सव का प्रारंभ होगा, जो कि जो 17 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन गणेशजी का मध्याह्न में जन्म हुआ था। इसलिए गणेशजी की मूर्ति की स्थापना भी मध्याह्न व्यापिनी तिथि में ही की जाती है। मध्याह्न व्यापिनी तिथि यानी दोपहर के समय में गणेशजी की मूर्ति की स्थापना करें।

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शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 बजकर तीन मिनट से लेकर दोपहर एक बजकर 34 मिनट के बीच भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। इस दिन सुबह का पूजा समय सात बजकर 45 मिनट से लेकर नौ बजकर 18 मिनट तक का है। वहीं, शाम को छह बजकर 37 मिनट से रात को आठ बजकर चार मिनट तक का समय बेहद लाभकारी माना जा रहा है। यह उत्सव 17 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ संपन्न होगा, जो भगवान गणेश को विदाई का प्रतीक है।

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पूजा विधि और स्थापना नियम

  • भगवान गणेश की मूर्ति को उत्तर-पूर्व कोने में स्थापित करना चाहिए और उसका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • आसन को शुद्ध करने के बाद लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर अक्षत रखें। इसके बाद ही उस आसन पर-गणपति बप्पा को शुद्ध हाथों से स्थापित करें।
  • भगवान श्रीगणेश को गंगाजल छिड़के-गणपति बप्पा की मूर्ति के बगल में रिद्धि-सिद्धि की मूर्ति रखें या इनकी जगह आप उनके स्वरूप में सुपारी भी रख सकते हैं।
  • भगवान की मूर्ति के दाहिनी ओर कलश रखें और उसमें जल भरें।
  • इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर गणपति बप्पा का ध्यान करें।
  • गणपति बप्पा को फल, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  • पूजा में ओहम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। अंत में गणेशजी की आरती करें।

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