
– नाकाम डीन ने मौतों से पलड़ा झाड़ा, हादसे के लिये बनी जांच समितियां सिर्फ नाम की
(धीरज बंसल)
भास्कर प्लस डाट काम
ग्वालियर। जेएएच के ट्रामा सेंटर आइसीयू में आग लगने और वेंटिलेटर सपोर्ट हटने से तीन मरीजों की मौत के बाद घबराए स्वजन मरीजों को छुट्टी कराकर निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं। क्योंकि जेएएच में अव्यवस्थायें पसरी हुई। इन्हीं लापरवाहियों के कारण तीन मरीज गत रोज आइसीयू अग्निकांड में जान गंवा चुके है। हादसे की जिम्मेदारी लेने के बजाये डीन आरकेएस धाकड़ अपनी नाकामियों से पलड़ा झाड़कर इन मौतों को अग्निकांड से जोड़ने से कतरा रहे है। इसके लिये उन्होंने बकायदा सरकारी प्रेसनोट जारी कर मौतों से पलड़ा झाड़ा है। अब ऐसे डीन को कुर्सी पर बैठने का कोई हक ही नहीं है, जो नाकाम हो और लगातार उसके संरक्षण में लापरवाहियों से मरीजों की मौत हो रही हों। मरीजों के भर्ती स्वजन भी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाहियों से दहश में है। वहीं अब अग्निकांड के बाद आइसीयू को बंद कर दिया गया है।
मरीजों के स्वजनों की माने तो न्यूरोलाजी-न्यूरोसर्जरी के साथ कमलाराजा अस्पताल में अब भी एक्सपायरी अग्निशमन यंत्र लटके हैं। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन द्वारा लोगों की जान को खतरे में डाला जा रही है। हालात यह है कि जेएएच की अव्यवस्थाओं से घबराए स्वजन मरीजों को छुट्टी कराकर निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं। न्यूरोलाजी- न्यूरोसर्जरी और कमलाराजा अस्पताल में आग बुझाने के जो सिलेंडर लगे हैं उनकी इस्तेमाल की समयावधि पूरी हो चुकी है, क्योंकि सिलेंडर में जो गैस होती है उसकी क्षमता आग पर काबू पाने की बहुत कम हो जाती है। अस्पताल प्रबंधन सब को कुछ देखते हुए भी दिखावे के लिए यह अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। ट्रामा सेंटर के आइसीयू में आग लगने के दौरान भी एक्सपायरी अग्निशमन यंत्र मिले थे। आइसीयू में आगजनी के दौरान भर्ती दस मरीजों में से तीन की वेंटिलेटर सपोर्ट हटने से मौत हो चुकी है। तीन मरीज न्यूरोसर्जरी के हेड इंजुरी वार्ड में भर्ती हैं। जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। चार मरीजों के स्वजन अव्यवस्था के चलते छुट्टी कराकर चले गए। बताते हैं कि इन्होंने अपने मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया है। घटना के बाद ट्रामा का आइसीयू सीलिंग एसी की मरम्मत होने तक के लिए बंद कर दिया गया है। मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। इस वार्ड में वेंटिलेटर लगा दिए गए हैं।

वहीं हादसे के बाद गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डा. आरकेएस धाकड़ ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कने की बात सामने आई है। जबकि गजराराजा मेडिकल कालेज में किसी भी मामले की जांच के लिए गठित की जाने वाली समितियां महज दिखावा है। अस्पताल में मारपीट के मामलों को लेकर गठित की गई जांच समितियां अब तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी हैं। इन जांच समितियों को एक दो दिन में ही जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया था, लेकिन यह अब तक जांच पूरी नहीं कर सकी हैं। मामला एक हजार बिस्तर अस्पताल के मेडिसिन आइसीयू में मरीजों के स्वजन के साथ जूनियर डाक्टरों द्वारा मारपीट किए जाने का है।
गठित समिति में एसडीएम लश्कर विनोद सिंह, सीएसपी अशोक सिंह जादौन, विभागाध्यक्ष न्यूरोसर्जरी डा. अविनाश शर्मा, विभागाध्यक्ष मेडिसिन डा. संजय धवले, विभागाध्यक्ष निश्चेतना डा. नीलिमा टंडन को शामिल किया गया है। समिति से पांच दिन में जांच प्रतिवेदन मांगा गया है। मानव अधिकार आयोग ने भी मांगा जांच प्रतिवेदन आइसीयू में आग लगने के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट हटने से तीन मरीजों की मौत के मामले को मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया है। आयोग ने कमिश्नर ग्वालियर संभाग, संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में मांगा है। जबकि आइसीयू के एयर कंडीशनर में लगी आग के तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई है।

