
(धीरज राजकुमार बंसल)
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने मंत्रिमंडल के सदस्यों को जिलों के प्रभार सौंपते समय वरिष्ठ नेताओं की पसंद और नापसंद का पूरा ध्यान रखा है। इस निर्णय से संकेत मिलते हैं कि मुख्यमंत्री निगम मंडलों में नियुक्तियां भी वरिष्ठ नेताओं के समन्यय से करेंगे। मुख्यमंत्री के संकेतों से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ आये कार्यकर्ता बैचेन है, क्योंकि संगठन स्तर पर इस बात के लिए दबाव है कि निगम मंडलों व संगठन में नियुक्ति करते समय पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को वजन दिया जाए। इससे दूसरे दलों से आए नेता बैचेन है। वे लोग अपनी जमीन छोड़कर आए हैं और उन्हें पार्टी में आए करीब पांच वर्ष हो गए हैं।
कैबिनेट मत्रियों को जिले के प्रभार सौंपे जाने के बाद निगम मंडलों में नियुक्तियां होनी है। यह नियुक्तियां भी मुख्यमंत्री प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से समन्वय के साथ करेंगे। इस बात के संकेत मिलने के बाद सिंधिया व अन्य नेताओं के साथ भाजपा में आये कार्यकर्ता बैचेन है। सिंधिया के साथ आये लोगों का कहना है कि हम लोगों को पार्टी में पांच वर्ष के लगभग हो गये हैं। कब तक हम पर बाहरी होने का टैग लगा रहेगा जबकि हमने पार्टी के सभी दिशा-निर्देशों का पालन भी किया है। इधर पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम लोगों ने अपना सर्वस्व पार्टी की विचारधारा को मजबूत करने के लिए समर्पित कर दिया। अब अगर हमारे साथ न्याय नहीं होता है तो मन तो दुखी होगा ही। किंतु मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कामकाज से साफ है कि यह सरकार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समन्वय के साथ चलेगी। हर निर्णय में सबकी सहमति नजर आयेगी।

