
ग्वालियर। हाल ही में सबसे ज्यादा चर्चित थाटीपुर का गोल्डन टॉवर प्रोजेक्ट रहा है। घटिया निर्माण और लोगों की जान को खतरे में डालने वाली इस बिल्डिंग का एक पिलर 16 जुलाई को ध्वस्त हुआ था, जिसके बाद बिल्डिंग एक ओर झुक गई थी। आधी रात रेस्क्यू कर सभी 27 परिवारों को सकुशल निकाल लिया गया था। तभी से सभी परिवार इधर उधर रहकर अपना समय काट रहे हैं। साथ ही ठेकेदार से लेकर पुलिस व निगम प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन इन सभी परिवारों की सुध अब तक किसी ने नहीं ली है। सभी परिवार बेघर होकर कहीं न कहीं अपना जीवन काट रहे है।
यहां बता दें कि गोल्डन टावर के पिलरों में आई दरार के बाद से खाली इस मल्टी को देखने फ्लैट के रहवासी जरूर आते है। लेकिन उन्हें बिल्डिंग में रिपेयरिंग तक का काम होता नहीं दिख रहा है। जबकि ठेकेदार बिंदल ने इसके पिलरों को रिपेयर करने की बात कही है। इस काम में समय भी लगना बताया जा रहा है। परंतु असल बात यह है कि क्या पिलर रिपेयर होकर बिल्डिंग रहने लायक हो पायेगी। इसके गिरने का खतरा लगातार बना रहेगा। क्योंकि जब नींव ही कमजोर है। इसी चिंता को बार-बार फ्लैट के रहवासी जता रहे है। इसलिये उनके द्वारा अपने रिफंड या फिर नई बिल्डिंग बनाकर फ्लैट देने की मांग की जा रही है। सूत्रों की माने तो पांच-छह साल में ही गोल्डन टावर मल्टी बिल्डिंग का यह हाल हो गया और इसके फ््लैट खरीदने वाले सड़क पर आये और रूपया भी बर्बाद हो गया। अब न जाने कितने ही ऐसे गोल्डन टावर शहर में होंगे, जो घटिया निर्माण कर बनाये गये होंगे। निगम के भवन अधिकारी भी ऐसे घटिया निर्माणों को आंख मूंद कर देखते है, क्योंकि ठेकेदारों से इनकी मिलीभगत हो जाती है और मलाई भी मिल जाती है। लेकिन ऐसे में आम आदमी लुट पिटकर बैठ जाता है और इंसाफ के लिये ठोकरे खाता है। मजेदार बात यह भी है कि गोल्डन टावर का घटिया निर्माण करने वाला ठेकेदार बिंदल अब भी मजे में है। प्रशासन इन पर कोई कार्रवाई ही नहीं कर रहा है। वह तो फ्लैट खरीदने वालों से मिल तक नहीं रहा है। बताया जाता है कि इस पर किसी बड़े भाजपा नेता का हाथ है। इसलिये वह ठसक में है और मासूम फ्लैट खरीदने वाले लोग परेशान और दर दर की ठोकरे खा रहे है। क्या इस मामले में प्रशासन को ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं करना चाहिये। साथ ही निगम को भवन अधिकारी और अन्य अधिकारियों को दोषी बनाना चाहिये जिनके कारण मासूम बेघर हो गये है। परंतु सबके सबके आंख मूंद कर बैठे है। वहीं गोल्डन टावरवासी को अब सिर्फ न्यायालय से ही इंसाफ की आस है।

